सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

बेशर्मी की हद

मैं किसी पार्टी का कार्यकर्ता नहीं हूँ लेकिन कांग्रेस और गांधी के प्रति कभी मेरे मन में अच्छी भावना नहीं आ सकी.इस देश की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार मैं इसी दोनों को मानता हूँ.वैसे तो कांग्रेस के बारे में सुरेश भैया बहुत कुछ लिख चुके हैं और लिख भी रहे हैं पर मैं इसलिए लिख रहा हूँ कि हो सकता है ये खबर झारखण्ड के अलावे और राज्यों में न फ़ैली हो.
२००४ से लेकर अब तक इसने अनगिनत ऐसे बेशर्मी की हद पार कर देने वाले काम किये हैं की शायद बेशर्म के देवता ने भी इसकी कल्पना ना की होगी.इसके पहले भाजपा के शाशन में उसके अच्छे कामों के बारे में तो मुझे ज्यादा पता नहीं है पर ऐसा कोई काम नहीं किया था जिसपर गुस्सा आये पर ये कांग्रेस ऐसे काम करती है कि कुछ पल के लिए तो बिलकुल ही विश्वास ही नहीं होता है कि कोई ऐसा भी कर सकता है.कभी ऐसा लगता ही नहीं है कि येलोग हमारे देश के लोग हैं बल्कि हमेशा ऐसा लगता है कि विदेशी लोग आ गए हैं भारत को बर्बाद करने. छोड़िए..! अभी बस मै ये खबर आपलोगों को देना चाह रहा था कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड(CBDT) ने कोड़ा-विनोद प्रकरण में छापेमारी का नेतृत्व करने वाले आयकर निदेशक उज्जवल चौधरी का तबादला कर दिया है.हालांकि ये खबर २ दिन पुराना है पर मेरा नेटवर्क की असुविधा के कारण आज लिख रहा हूँ.क्या ये बशार्मी की हद नहीं है.....?चौधरी जी मात्र ७ महीहे के लिए रहे हैं इस पद पर जबकि नियम के अनुसार ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर न्यूनतम कार्यकाल ३ सालों का होता है.जैसे ही कोड़ा के साथ-साथ केंदीय मत्री जी फंसने लगे तुरंत इनलोगों ने सारे नियम कानून और लाज-हया(वो भी इनलोगों के पास हो तो) को अपने अंडरवेयर के जेब में रखकर इनको जांच से हटा दिया.ये तो सबको पता होगा कि कोड़ा के पास इतना दिमाग तो नही होगा कि वो अकेले इतना बड़ा घोटाला को अंजाम दे दे.
ये तो हुई इनके हाल के कारनामे अब थोडा सा इनके पुराने कारनामों पर भी एक नजर डाल लें..
१.आनंद भैया ने आज लिखा है कि बाघों को बचाने की इतनी चिंता की जा रही है और २००००० किसानों ने जो आत्महत्या कर ली इनकी सुधी लेने वाला कोई नहीं.तो ऐसी स्थिति में जब किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं तो बी.टी. बैगन का अपने देश में लाना कहाँ तक सही है.आखिर क्यों ये सरकार जब से सत्ता में आई है तब से इसे भारत में लाने को मारी जा रही है.ये तो कोई मूर्ख भी समझ सकता है कि जिस कीड़ेमारने वाली दवा को पी लेने से किसी आदमी की जान चली जाती है उसी दवा का गुण अगर बैगन में अन्दर से हो तो उसका क्या असर होगा.क्या इस छोटी सी बात को समझने के लिए किसी जाँच समीती की आवश्यकता है..?और वैसे भी इसके दुस्परिनाम पहले ही भारत और अमेरिका में देखे जा चुके हैं.इस बीज को सिर्फ एक ही विदेशी कम्पनी बनाती है तो क्या हमारे देश के किसान उस कम्पनी के गुलाम नहीं बन जायेंगे उसके बाद फिर और ज्यादा आत्महत्याएं नहीं होंगी हमारे देश में.हमारे देश में बैगन कि कौन सी कमी पड़ गयी है जबकि इस देश के लगभग १००% लोग सर्दी-खांसी और कफ के शिकार हैं और कारण जो भी हो पर लोग खाना पसंद नहीं करते इसे.हाँ अगर कोई ऐसी सब्जी जिसका हमारे यहाँ अकाल पड़ा हुआ है तो फिर कोई सोचने की बात है.
२.इनके शाशनकाल में जितने ज्यादा और बड़े-बड़े आतंकवादी घटनाएं हुई है क्या पहले कभी हुई थी ...?और फिर इस घटना में पकडे गए आतंकवादियों का ससुराल में नए-नए दामाज जी जैसा स्वागत करना....?
३.उस समय तो मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था जब ये हमारे पौराणीक धरोहर राम-सेतु को मिटाने पर तुल गए थे.अगर वो रामसेतु नहीं भी है तो करोड़ों भारतियों को दुखी करके उसे तोड़ने की क्या जरुरत पडी थी...?
४.अपना वोट बैंक बढाने के लिए लाखों(शायद करोड़ों) बांग्लादेशियों को या कहें आतंकवादियों को अपने घर में घुसा लिया.कुछ दिन बाद वोसब मिलकर हिंसात्मक कार्यवाई द्वारा अलग राज्य की मांग नहीं करने लगेंगे...?
५.अपने देश के लोग जिसके पास ज्यादा उन्नत हथियार नहीं है वो नक्श्ली लोग,तांडव मचा रहे हैं झारखण्ड और बंगाल में और सरकार सिर्फ गीदड़-भबकी से ज्यादा कुछ भी नहीं कर पा रही तो चीन जैसे शक्तिशाली देश का सामना कैसे करेगी जबकि वो भारत से काफी मजबूत स्थिति में है.....?
६.क्या लगता है कि इस तरह एक-एक कर इनके ५-६ सालों के महत्वपूर्ण कारनामों को भी गिनाया जाय तो इस लेख का अंत हो पाएगा..........?

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उम्दा व सार्थक लिखा है आपने ।

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  2. सादर वन्दे
    मै आपमे एक और सुरेश चिपलूनकर देख रहा हूँ, लिखते रहिये क्योंकि सार्थक लिखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है,
    इस विचारपरख लेख के लिए साधुवाद.
    रत्नेश त्रिपाठी

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  3. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।
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