बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

महान कारनामे महान लोगों के ही नाम होते है...


ज़रा इस फोटो को ध्यान से देखिये तो पता चल जाएगा कि महान लोग कैसे होते हैं.इस फोटो को जब मैंने पहली बार ही देखा था तो सबसे कहा था कि देखो महान लोग कैसे होते हैं.जिस चीज को येलोग देख रहे हैं उस चीज को सचिन भी देख सकते थे वो तो सामने में ही थे लेकिन उन्होंने अपनी नजरें फेर ली.अब इन तीनो को देखिये कि कैसे ये बात युवराज से लेकर उथप्पा तक चालन विधि द्वारा पहुचती है.आज समय है कि ये फोटो सबको दिखाऊ इसलिए आपलोगों को दिखा रहा हूँ.सचिन भैया को मै महान इसलिए नहीं मानता हूँ कि उनके नाम बहुत बड़े-बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं बल्कि उनके महान चरित्र से उनको महान मानता हूँ.बहुत खुशी हुई कि भगवान् ने इस महान रिकॉर्ड के लिए सचिन भैया को चुना क्योंकि खेल के मामले में तो बहुत से खिलाड़ी उनसे अभी आगे हो सकते हैं लेकिन महानता में कोई उनसे आगे नहीं है अभी,जिसे कल भगवान जी ने दिखा दिया.३६ साल की उम्र के बावजूद जब शरीर कमजोर हो जाता है उस उम्र में इतनी बड़ी पारी खेलना उनकी महानता को कई गुना बढ़ा देता है.ये कारनामा वो अगर उस समय करते जब पूरी दुनिया में बस वो ही छाये हुए थे तो उनके महानता दिख नहीं पाती क्योंकि उस समय वो युवा थे.उस समय वो खुलकर खेलते थे पर अब जब उनपे डॉक्टरों द्वारा बहुत तरह के उनके पसंदीदा शोट्स खेलने पर प्रतिबंद लगा दिया गया हो और इसकारण उनके छक्के मारने की संख्या में भी कमी आई हो तो ऐसे समय में इस तरह की पारी खेलना उनके आलोचकों को भी अपना दीवाना जरूर बनाएगी. इसलिए बिल्कुल सही समय पर उन्होंने २०० रन की पारी खेली जो कि अबतक वन-डे के २९६१ मैच में नहीं हो पाया था.मुझे तो बहुत दुःख है कि मै उनकी ये महान पारी नहीं पाया पर जैसा मेरे दोस्तों ने बताया कि सचिन भैया बार-बार अपनी पीठ पकड़ रहे थे इससे उनकी धैर्य और सहनशक्ति दिखती है.इस उम्र में ५० ओवर तक लगातार बल्लेबाजी करना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है.
और लोगों की तो मुझे नहीं पता लेकिन किसी भी व्यक्ति ने बहुत बड़े-बड़े कारनामे ही क्यों ना किये हों लेकिन वो अगर चरित्रहीन होते हैं तो मैं चाहकर भी उन्हें पसंद नहीं कर पाता हूँ.मुझे वही लोग पसंद आते हैं जिन्होंने कारनामे भले ही छोटे किये हों लेकिन वो चरित्र का धनी हों.और दुःख भी होता है जब ये देखता हूँ कि कोई व्यक्ति अगर बहुत ज्यादा प्रसिद्धि पा लेते हैं तो उस प्रसिद्धि में लोग उनके बुराइयों को ढक देते हैं.इसलिए मै तो यही चाहूँगा कि लोग किसी को महान उनके बड़े कारनामे से नहीं बल्कि उनके चरित्र से बनाएं.खेल में तो अभी भी एक रिकॉर्ड एक छिछोरे के पास है जो मै कब से टूटने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ.आशा है कि जल्दी ही युसुफ़ पठान युवराज या धौनी३७ के बजाय ३० गेंदों पर शतक बनाकर इस रिकॉर्ड को उससे छीन लेंगे
अब ज़रा अपने इन होनहार उथप्पा और कार्तिक के बारे में बात करते हैं.येलोग उस जगह पर पहुच चुके हैं जहाँ पर इनके कंधे पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी अपने आप जाती है.ये लोग पुरे भारत देश का प्रतिनिधित्व कर रहे है.इनके चरित्र से विश्व के लोग पुरे भारत देश का चरित्र देखेंगे..क्या ये बात इनलोगों को पता नहीं है.उथप्पा का ज्यों-ज्यों नाम बढ़ता गया त्यों-त्यों उसका चरित्र भी गिरता गया और खेल का स्तर घटता गया नहीं तो वो एक बहुत अच्छा खिलाड़ी था और आज वो भारतीय टीम में होता.

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