गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

राहुल गांधी तो अबतक युवा भी नहीं हुए हैं......

राहुल अँकल पर गुस्सा तो आता था लेकिन पर अब तक इतना नहीं आया था कि इनपे कोई ब्लोग लिखूँ पर जब सुरेश भैया ने ने इतना बडा़ लेख लिखा और उस पर मैने टिप्पणी करनी चाही तो वो बहुत बडा़ हो जा रहा था तो सोचा एक अलग से ब्लोग ही लिख देता हूँ.
क्या किस्मत पायी है अन्कल जी ने कि हमलोगों को अपना समय बर्बाद करके इनपे लेख लिखना पड़ रहा है.खुशी तो नही होती इन महानुभाव पर लेख लिखकर किंतु ऐसे-ऐसे कारनामे किये हैं इन्होंने कि बहुत गुस्सा आता है और लोगों को भी सच्चाई बताना आवश्यक हो जाता है.इनके बारे में ज्यादा जानकारी तो मुझे भी नहीं है लेकिन बीच-बीच में इनके कारनामें सुनने को मिलता रहता है.हमलोग तो कुछ समझ भी लेते हैं लेकिन कुछ लोग हमलोग से भी भोले होते हैं जो समझ नहीं पाते हैं.उनमें से ज्यादातर तो लड़कियाँ ही हैं जो इस ३५-३६ साल के बुजुर्ग युवा के पीछे दीवानी है.इन्हे कौन समझाये और कैसे...?ये लोग तो ब्लोग भी नहीं के बराबर ही पढ़ती हैं.(वैसे एक तरीका आ रहा है मेरे दिमाग में इनको ब्लोग पढ़वाने का..लड़कियाँ ऑरकुट का बहुत उपयोग करती हैं तो उन्हे इस तरह के ब्लोग का लिन्क देकर...)हो सके तो आपलोग ज्यादा से ज्यादा ऑर्कुट पर अपने लड़की दोस्तों को लिन्क दें..
राहुल अंकल युवाओं से मिलने कालेज कैम्पस जाया करते हैं.....पर युवाओं से कम युवतियों से ज्यादा......पटना में भी कहीं और उनको जगह नहीं मिला.मिला तो महिलाओं का कॉलेज जहाँ लडकियाँ इसको छूने के लिये,उनसे हाथ मिलाने के लिये व्याकुल रहती हैं और ये उनकी भीड़ मे दबे हुए मजे लेते रहते हैं..मैंने तो प्रभात खबर में फोटो में देखा था.उनपर लडकियाँ ऐसे टूट पडी़ थी जैसे धन्वन्तरी पर असुर टूट पडे़ थे उनसे अमॄत छिनने के लिये.आखिर कौन सा अमॄत है राहुल के पास...?राहुल पे तो गुस्सा आता ही उससे ज्यादा गुस्सा उन लड़कियों पे आ रहा था.आखिर क्यों,,उसकी चमड़ी क्या हमलोगों से अलग है..?क्या वो कोई देवदूत है या भगवान....?
क्या हो गया हमारे भारत को.कहाँ चला गया वो नारी का नारीत्व जिसके सामने भगवान ने भी घुटने टेक दिये थे...पहले की नारियाँ अपने पति को भगवान से भी बढकर मानती थी.इसलिये त्रिदेव के सामने भी निर्वस्त्र नही हुई और अभी एक राहुल जैसे छिछोरे पर सब कुछ लुटाने को तैयार....आखिर लडकियाँ क्या सोचती हैं........कि वो उसे मिल ही जायेगा और १८-२० साल की लड़की अगर ४० साल के आदमी को पाने की इच्छा करे तो कितने शर्म की बात है ये....!शायद लड़कों की बराबरी करते-करते लड़कियों ने अपना शर्म खो दिया पर सच ये है कि लड़के भी ऐसे नही होते हैं.लडकों को भी किसी हिरोईन को छूने या देखने के लिये इतना ललायित नही देखा है मैंने..भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि फ़िर से वो शर्म लौटा दें मेरे देश की इन कन्याओं में...
अब शर्म की इतनी बात कर रहा हूँ तो एक और बात बता देता हूँ बेशर्मी की.कुछ दिन पहले रष्ट्रपति जी ने अपने भाषन में कहा कि महँगाई इसलिये बढ़ रही है क्योंकि सरकार गरीबों पर पैसा खर्च कर रही है..यानि सरकार की कोई गलती नहीं, जो भी गलती है वो इन गरीबों की है.सारे महँगाई की जड़ ये गरीब ही हैं.अब रष्ट्र्पति जी ये बतायें कि उन्होनें गरीबों को जो दिया वो तो महँगाई बढा़कर वापस ले ही लिया तो इसमें गरीबों को क्या फ़ायदा दिया आपने और आप गरीबों पे नहीं तो क्या अमीरों पे खर्च करेंगे...............?
क्या झुठ लग रही है मेरी बात...?विश्वास नही हो रहा है...मुझे भी नही हुआ था एक पल के लिये फ़िर खुद को तुरन्त सम्भाला और सोचा कि ये कोंग्रेस है ये बेशर्मी की हद को कई सौ यौजन पीछे छोड देने वाली ही काम करती है.चलिये काँग्रेस के बारे में तो मैंने अपने पिछ्ले ब्लोग में लिख ही दिया है अब राहुल के बारे मे बात करते हैं कि आखिर आजकल वो इतनी छिछोरी हरकतें क्यों करने लगे हैं........
इसमें कोई शक नहीं कि उन्होनें लड़कियों को अपना निशाना बनाया है अपना वोट बढा़ने के लिये.वैसे बहुत अच्छा सोचा है क्योंकि लड़कियों पर नजर डालने वाली तो ये इकलौती पार्टी है..सोचिये अगर सिर्फ़ लड़कियों और उनके ब्वायफ़्रेंड या पति का ही वोट उनको मिल गया तो कितनी आसानी से जीत जायेंगे.........!
वैसे ये सब तो हुई बाहर की बातें अब जरा कुछ गहराई से सोचा जाय तो..........
आज से कुछ साल पहले जब मैंने सुना था कि राहुल भैया अबतक कुवाँरे हैं तो सोचा कि कोई बात नही विदेशी खून है थोड़ा ठंडा होगा इसलिये...सुना था कि विदेशियों मे यौवनावस्था देर से आता है तो कोई बात नहीं ......
तो क्या अब,,,,,?अब उनकी जवानी उफ़ान मारने लगी है..................जिस उम्र में लोगों के खुद के बेटे जवान होने को होते हैं उस उम्र में..........?इनकी छिछोरी हरकतऒं के पीछे क्या कारण है.........?

वैसे दीपक जब बुझने वाला होता है तो वो बहुत जोर से भभकता है तो कहीं ये उसी की निशानी तो नहीं...........?

च्च...!च्च....!ओह..अब दया आने लगी बेचारे पे......(सच में उनपे गुस्सा आते-आते अब दया आने लगी)बेचारे को खुद को कितना रोकना पड़ा होगा ना....!कितना दुहा गया है इस बेचारे को वो भी इसकी अपनी माँ ने ही.......!जिस तरह हिरोइनें ४० की उम्र के आसपास शादियाँ करती हैं इस डर से कि अगर जवानी में शादी कर ली इन्होनें तो इनके चाहने वालों की संख्याँ कम हो जायेगी और उनका धन्धा चौपट हो जायेगा..ठीक उसी तरह इन्होनें भी सोचा कि अगर शादी नही करेंगे तो युवा बने रहेंगे और युवा-युवा करके लडके-लड़कियों को बहकाते रहेंगे....लेकिन कब तक......?आधा बुढा़पा तो उनके सर से ही झाँकने लगी है.गिने_चुने बाल बचे हैं अब......
कब तक युवा कहते रहेंगे वो अपने आप को..............
और ऐसा युवा किस काम जो ये कहता हो कि वो अभी प्रधानमंत्री के पद के लायक नही हुए हैं.........?तो कब लायक होंगे बुढा़री में......?तो फ़िर ये युवा-युवा का क्यों हल्ला मचा रखे हैं......?और हमारी भोली-भाली जनता भी राहुल के हवा में बही जा रही है...एक बार जरा सोचकर देखिये कि घूमने फ़िरने मस्ती करने और भीड़ जुटाने गरीबों के घर मे रात बीताने काँग्रेस का प्रचार करने के अलावा और किया क्या है उन्होनें...?देश की किसी समस्या के हल के लिये कोई रणनीति तैयार की है....?संसद में उनकी मुँह से आवज तक नही निकलती है..जहाँ तक पता चला है कि अब तक एक बार ही मुँह खोला है उन्होंने....
दोष जनता का भी नही है.इसने तो अब तक ५०-६० साल के आदमी को ही देखा है नेता के रूप में तो इन्हें तो ये ३६ साल का आदमी भी युवा लगेगा ही..........?अगर ये युवा हैं तो फ़िर मैं क्या हूँ..?
ये तो अभी भी अपने आप को ना प्रधानमंत्री के लायक समझते हैं ना शादी के तो इन्हें युवा क्यों बच्चा कहिये ना.अभी तक इनके दूध के दाँत भी नही टूटे तो भला शादी कैसे करेंगे और प्रधानमंत्री कैसे बनेंगे...?इस हिसाब से तो मै इनसे बडा़ हूँ.मैंने तो बचपन से ही अपने देश की दूर्दशा देखकर इसका प्रधानमंत्री बन इसे विश्व का सबसे खुशहाल और शक्तिशाली देश बनाने का सपना देखा है..अगर मौका मिलता तो उस समय भी मैं इस पद पर जरूर बैठ जाता.......
काश! कि जनता इस बच्चे के पीछे जितनी दीवानी है अगर मेरे पीछे होती तो शायद मेरा इस देश को सबसे शक्तिशाली देश बनाने का सपना पूरा हो जाता.
मैंने इनको राहुल अंकल इसलिये कहा क्योंकि मैं २२ साल का हूँ तो मेरे लिये तो ये मेरे चाचा के उम्र के ही बराबर के हैं.मैं तो इन्हें भैया नही कहने वाला ....अपलोगों को कहना है तो कहते रहिये..........

***आज के समय में जब मीडिया पूरी तरह बिक चुकी है(चाहे वो समाचार-पत्र हो या न्यूज चैनल,न्यूज चैनल तो हद से ज्यादा बर्बाद हो गया है इतना कि वो अब देखने लायक भी नही रहा)और सच्चाई दिखाने के बदले लोगों को भ्रमित कर रही है तो ऐसे समय मे ब्लोग ही एक माध्यम दिख रहा है लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का इसलिये ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसे भेज कर पढ़ने के लिये प्रेरित करिये..***बिकने का तो ब्लोगर भी बिकते हैं लेकिन बहुत कम..क्योंकि मीडिया का उद्देश्य पैसा कमाना होता है इसलिए बिकना उसकी मजबूरी बन जाती है लेकिन ब्लोग लिखने मे कुछ खर्च नही होता..अपना समय बर्बाद करके इतनी मेहनत करके अगर कोई ब्लोग लिखता है तो इसलिए कि उसे अपने देश की चिन्ता होती है..
मुझसे कई गुणा ज्यादा अच्छा लेख सुरेश भैया लिखते हैं इसलिये उनका ब्लोग का लिन्क दे रहा हूँ। आपलोग जरूर पढियेगा राहुल भैया के बारे मे और ज्यादा जानकारी मिल जायेगी.और उनके subscriberबन जाइएगा ॥ताकि उनका हरेक नया लेख आपको मिलता रहे ..
http://blog.sureshchiplunkar.com/2010/02/rahul-gandhi-indian-politics-and.html

3 टिप्‍पणियां:

  1. ठीक ही तो है; राहुल शरीर में भले ही अर्धू-बूढ़ा दिखते हों, बुद्धि में तो अभी सामान्य बच्चों से भी पीछे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मार्केटिंग का ज़माना है भैया. कूड़ा भी यहाँ चमकीली पैकिंग में हजारों-लाखों में बिक जाता है.

    वैसे राहुल बाबा कुंवारे नहीं हैं, एक वेनेज़ुअलियन कन्या से ब्याह रचा चुके हैं. विश्वास न हो तो लिंक पढ़ लीजिये-
    http://www.janataparty.org/patriotic.html

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय महोदय,
    सादर प्रणाम,

    पिछले कई दशक से हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा देने के सम्बन्ध में एक निर्थक सी बहस चल रही है. जिसे कभी महिला वर्ष मना कर तो कभी विभिन्न संगठनो द्वारा नारी मुक्ति मंच बनाकर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाता रहा है. समय समय पर बिभिन्न राजनैतिक, सामाजिक और यहाँ तक की धार्मिक संगठन भी अपने विवादास्पद बयानों के द्वारा खुद को लाइम लाएट में बनाए रखने के लोभ से कुछ को नहीं बचा पाते. पर इस आन्दोलन के खोखलेपन से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है शायद तभी यह हर साल किसी न किसी विवादास्पद बयान के बाद कुछ दिन के लिए ये मुद्दा गरमा जाता है. और फिर एक आध हफ्ते सुर्खिओं से रह कर अपनी शीत निद्रा ने चला जाता है. हद तो तब हुई जब स्वतंत्र भारत की सब से कमज़ोर सरकार ने बहुत ही पिलपिले ढंग से सदां में महिला विधेयक पेश करने की तथा कथित मर्दानगी दिखाई. नतीजा फिर वही १५ दिन तक तो भूनते हुए मक्का के दानो की तरह सभी राजनैतिक दल खूब उछले पर अब १५ दिन से इस वारे ने कोई भी वयान बाजी सामने नहीं आयी.

    क्या यह अपने आप में यह सन्नाटा इस मुद्दे के खोख्लेपर का परिचायक नहीं है?

    मैंने भी इस संभंध में काफी विचार किया पर एक दुसरे की टांग खींचते पक्ष और विपक्ष ने मुझे अपने ध्यान को एक स्थान पर केन्द्रित नहीं करने दिया. अतः मैंने अपने समाज में इस मुद्दे को ले कर एक छोटा सा सर्वेक्षण किया जिस में विभिन्न आर्थिक, समाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक और धार्मिक वर्ग के लोगो को शामिल करने का पुरी इमानदारी से प्रयास किया जिस में बहुत की चोकाने वाले तथ्य सामने आये. २-४०० लोगों से बातचीत पर आधारित यह तथ्य सम्पूर्ण समाज का पतिनिधित्व नहीं करसकते फिर भी सोचने के लिए एक नई दिशा तो दे ही सकते हैं. यही सोच कर में अपने संकलित तथ्य आप की अदालत में रखने की अनुमती चाहता हूँ. और आशा करता हूँ की आप सम्बंधित विषय पर अपनी बहुमूल्य राय दे कर मुझे और समाज को सोचने के लिए नई दिशा देने में अपना योगदान देंगे.

    http://dixitajayk.blogspot.com/search?updated-min=2010-01-01T00%3A00%3A00-08%3A00&updated-max=2011-01-01T00%3A00%3A00-08%3A00&max-results=6
    Regards

    Dikshit Ajay K

    उत्तर देंहटाएं