रविवार, 30 मई 2010

ये क्या.!!!हमारे महात्मा(गाँधी) निर्वस्त्र लड़्कियों के साथ सोते थे!!!!!


छिः!!छिः ये क्या!!? हमारे महात्मा गाँधी जी नंगी लड़कियों के साथ सोते थे वो भी अपनी पोती के साथ......!!नहीं,नहीं ये कैसे हो सकता...!माना कि उन्हें मुसलमानों से बहुत लगाव था पर इसका मतलब ये थोडे़ ही होता है कि वो उनके जैसा आचरण भी करने भी लगें........!!पर जब उन्होंने ऐसा किया है तो इसमें जरुर उस महात्मा का कोई महान उद्देश्य छिपा होगा जिसे भला हम मूर्ख छोटबुद्धिया और पापात्मा भला कहाँ से समझ पाएँगे..इसे समझने के लिए तो भई सत्य और अहिंसा की शक्ति चाहिए जो सृष्टि-उत्पत्ति से लेकर आज तक सिर्फ़ एक ही इन्सान गाँधी जी में ही तो दी थी भगवान ने..अब भला जो गुण और शक्ति(सत्य-अहिंसा की)हमारे भगवत अवतार राम और कृष्ण में भी नहीं था वो गुण गाँधी जी में था तो ऐसा इन्सान तो भगवान से भी बढ़कर हुआ ना..!!तो भला ऐसे इन्सान के बारे में तो जरा सा भी कुछ गलत सोचना पाप ही नहीं बल्कि महापाप होगा.है ना.....? इसलिए आपलोग भी अपने पापी मन को शुद्ध करके इस घटना को पढि़एगा...ठीक है.....!! देखिए ये बात उस समय की है जब हमारे मुसलमान भाई पाकिस्तान को भारत से अलग करने के लिए पूरे भारत में हिन्दुओं को गाजर-मूली की तरह काट रहे थे..........१९४६-१९४७ में नौआखली में वो हिन्दुओं की खून की नदियाँ बहा रहे थे उन्हें बलपूर्वक मुसलमान बना रहे थे उनकी स्त्रियों के साथ बलात्कार कर रहे थे और अंग-भंग कर रहे थे,उनके बच्चे को पटक-पटक कर मार रहे थे,उस समय हमारे महात्मा गाँधी जी वहाँ पर हिन्दुओं को अहिंसा का मर्म समझाने गए हुए थे.सच्चाई ये थी कि वे मुसलमानों को बचाने गए थे कि कहीं हिंदु भी बदला लेने के लिए मुसलमानों का खून ना बहाने लगे...वे हिंदुओं को समझाते थे कि भले ही मुसलामान आप पर अत्याचार करे पर आप हिंसा का मार्ग मत अपनाना..आखिर ये मुसलमान हम हिंदुओं के भाई ही तो हैं...इनके हाथों अगर आप मर भी गए तो बहुत बडा़ पुण्य करेंगे और सीधे स्वर्ग पहुँच जाएँगे {०{जिस प्रकार रावण राम के हाथों मर कर मोक्ष को प्राप्त हुआ था...}०}..अगर ये आपके माँ पत्नी या बेटियों के साथ संभोग कर रहा है तो क्या हुआ आखिर ये अपने ही तो हैं कोई पराए थोडे़ हैं,अगर इन्होंने आपके माँ-बेटियों के साथ संभोग कर लिया तो इससे वे अशुद्ध थोडे़ हो गए वो तो गंगा जैसी पवित्र हो गयी................
आपसब जानते हैं कि हमारे महात्मा दूसरों को वही शिक्षा देते थे जो वो खुद अपने ऊपर लागू कर लेते थे..यहाँ भी तो वो शिक्षा अपने उपर लागू करी उन्होंने..वो भी अपने पोतियों के साथ सोते थे आखिर वो उसके अपने दादा जी जो थे..भई अब अपने तो अपने होते हैं ना......!!!
उस समय नौआखली में जब उनके प्रशंसकों ने देखा कि गाँधी जी जो उस समय ७७ साल के थे अपनी १९ साल की पोती मानू गाँधी के साथ सोए तो पहले तो उनके मन में भी बुरा विचार आया फ़िर झट से अपने विचार को पवित्र किए और सोचे कि शायद ठण्ड बहुत ज्यादा है जिसकी वजह से गाँधी जी ने गर्मी के लिए ऐसा किया पर जैसा मैंने पहले ही बता दिया है कि महात्मा की महान बातें उनके अलावे और कोई नहीं समझ सकता....तो बापू जी ने खुद सच्चाई से सबको अवगत कराया कि वो १८-१९ साल की जवान लड़कियों के साथ निर्वस्त्र सोते हैं अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए..वो अपने ब्रह्मचर्य के व्रत को परखना चाहते हैं कि उनमें कितनी क्षमता है अपने आप को नियंत्रित करने की...अपने विकारों पर विजय प्राप्त करना चाहते थे वो..वो देखना चाहते थे कि अपने ब्रह्मचर्य व्रत का वो सिर्फ़ तन से ही नहीं बल्कि मन से भी पालन कर रहे हैं कि नहीं..यदि वो औरत की बाहों में अपनी रात बिताते हैं और उनके मन में कोई विकार नहीं आता है तो ये उनकी विषय-विकारों पर विजय प्राप्ति होगी जिसका मतलब है कि वो पूर्ण संत बन गए...(आखिर जब महात्मा की उपाधि ले लिए थे तो उसे प्रमाणित करना भी तो जरुरी था ना और ये उनका कर्त्तव्य भी बनता था,,,तो वो अपने कर्त्तव्य से पीछे क्यों हटते भला))),,,उन्होंने अपना कर्त्तव्य निभाया मुझे इस बात का दुःख नहीं है,दुःख इस बात का है कि क्या इन सब बातों के लिए यही समय उचित जान पडा़ उन्हें जब पूरा बंगाल हिंसा की आग में जल रहा था...
वैसे मानू उनके लैब(प्रयोगशाला) की पहली लैब पार्टनर नहीं थी....उनके परिवार की जो लड़कियाँ १८ साल की हो जाती थीं वो उनके प्रयोगशाला की परीक्षण सामग्री बन जाती थी... निर्मल कुमार बोस जो यूनिवर्सिटी के लेक्चरर थे उस समय गाँधी जे के लिए दूभाषिए का काम कर रहे थे नौआखली में,उन्होंने अपनी पुस्तक "my days with Gandhee jee" में इन सब बातों को स्वीकारा है..उनका कहना था कि वे जिस औरत को अपने साथ सोने के लिए चुनते थे वो औरत अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझती थी...उसे लगता था कि गाँधी जी का उसपर बहुत स्नेह है...इन सब बातों से आप ये मत समझ लिजिएगा कि निर्मल जी उनके आलोचकों में से थे..वे उनके पक्के भक्त थे....और ये तो आप भी समझ सकते हैं कि वो उनके सच्चे भक्त और काफ़ी नजदीकी रहे होंगे तभी तो इतनी सारी अंदर की बातें जानते थे....
उनके एक और सच्चे भक्त थे जेड एडम्स जिन्होंने Gandhi:Naked Ambition लिखा है. ..इन्होंने महात्मा जी के अनेक कार्यों का और उनके जीवन से जुडी़ सैकडों घटनाओं का संग्रह किया है जिसमें महात्मा जी का खुद का दिया हुआ दो साक्षात्कार भी है.ये समझना मुश्किल नहीं है कि इतना सब कुछ कोई प्रशंसक ही कर सकता है....एडम्स जी के अनुसार गाँधी जी अपनी अशिक्षित पत्नी कस्तुरबा गाँधी को बस शारीरिक सुख देने वाली उपभोग की वस्तु समझते थे और जवान नारियों पर मोहित हुआ करते थे..सरला देवी चौधरानी,रविन्द्रनाथ टैगोर की भतीजी पर वो फ़िदा थे जिन्हें वो अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहा करते थे..इसके अलावे सुशीला नायर,आभा और मानू भी थीं...मजाक में वो अपने आप को बहुपत्नीवादी कहा करते थे..वो उनलोगों से मसाज करवाते थे,उनलोगों के साथ निर्वस्त्र सोते थे,बिल्कुल नग्न होकर उनके साथ नहाते थे और चलते भी थे तो उनके कन्धे पर हाथ रखकर......जब उनके भक्त आश्चर्यचकित होकर उन्हें टोक देते थे तो वो कहते थे कि वो अपने विकारों को नियंत्रित करने का परीक्षण कर रहे हैं...एडम्स जी ने गाँधी जी के सोने का भी अजीब तरीका का वर्णन किया है..उनके अनुसार गाँधी सैन्डवीच तरीका अपनाते थे यानि कि २ नंगी लड़कियों के बीच में सोते थे..ये तो स्वभाविक ही है क्योंकि ये तो हम अखाडे़ में भी देखते हैं कि जब कोई पहलवान बहुत ज्यादा बलवान होता है तो वो अपने शक्ति-परीक्षण के लिए एक साथ २-३ पहलवानों को आमंत्रित करता है..तो हमारे महात्मा भी तो कोई छोटे-मोटे संत नहीं थे ना..!!!अब आपलोगों के मन में अगर ये बात आ रही होगी कि ये परीक्षण तो वो अपनी पत्नी पर भी कर सकते थे तो ये बताने की जरुरत नहीं है कि कस्तुरबा जी उनसे उम्र मेम २ साल की बडी़ थीं तो आपलोग अंदाजा लगा सकते हैं कि गाँधी के ३० बरस पूरे होते-होते कस्तुरबा जी का आकर्षण खत्म होने को होगा और गाँधी जी ने तो ये प्रयोग मरते दम तक जारी रखा था..एक बात और कि गाँधी जी को शुरु से ही शर्म आती थी कस्तूरबा जी को अपनी पत्नी कहने में...जब वो करीब १८-२० की उम्र में इंगलैण्ड गए थे वकालत की शिक्षा प्राप्त करने तो वहाँ पर इन्हें अपने कस्तूरबा के पति होने पर इतनी शर्म आयी कि इस सत्य के देवता को भी झूठ कहना पड़ गया..इन्होंने सबसे यही कहा कि ये अभी कुँवारे ही हैं..अपने आप को कुँवारा कहने के पीछे इनका एक स्वार्थ तो ये भी रहा होगा कि वहाँ की गोरी-गोरी लड़कियाँ इनके पास आने के लिए अपना रास्ता साफ़ (clear) समझें पर ऐसा कुछ हुआ नहीं...इनको अविवाहित जानकर भी कोई लड़की इनके करीब नहीं आई तब आ गए ये रास्ते(लाईन) पे और फ़िर अपने सच्चरित्र का ढोल पीटने लगे......
ये नंगी लड़कियों के साथ सोने वाली सब बातें पढ़कर अगर किसी को गुस्सा आ जाय तो उनसे मेरा निवेदन है कि कृपया मेरे माथा पर नारियल मत फ़ोड़िएगा...मैंने भी जब इस तरह की बातें नेट पर देखी थी तो मुझे विश्वास नहीं हुआ था पर जब"Hindustan Times" के सम्पादकीय में ये सब पढा़ तो विश्वास करना पडा़....मैं तो इन सब बातों को गलत मानता हूँ..मेरा तो मानना है कि गाँधी जी भक्तों ने गाँधी जी की इज्जत बचाने के लिए ये सब बातें उडा़यी है क्योंकि औरत की बाहों में सोने में तो कोई मर्द रुचि रखता है और गाँधी जी में पुरुषत्व था ये बात तो मेरे गले से नीचे नहीं उतरती है...और जहाँ तक मेरा मानना है तो उनके बेटे लोगों को और उनके नजदीकियों को ये बात पता होगी तभी तो उन्होंने कभी आपत्ति ना जाताई उनके इस तरह के क्रिया-कलापों से... उनके बेटे लोगों को और नजदीकियों को आपत्ति तभी होती थी जब गाँधी जी किसी मुसलमान पुरुष के साथ रात बिताया करते थे(जाहिर सी बात है किसी भी पुत्र को अपने पिता का शील-भंग होना वो भी एक मुसलमान के हाथों बुरा लगेगा ही )))
ओबामा से लेकर आइंस्टीन तक पूरी दुनिया जिसकी भक्त है मैं भी उनका भक्त हूँ जी.....और जो महात्मा राम-कृष्ण से बढ़कर हो उसका भला कौन भक्त नहीं होगा दुनिया में..एक तरफ़ बेवकूफ़ अत्याचारी और निर्दयी राम जिनपर लाखों देवियाँ कुर्बान थीं वो एक नारी के लिए समुन्द्र पर उतना भारी पूल बना दिए वो भी अगर समुन्द्र देवता ना मानते तो पूरा समुन्द्र को सूखाने के लिए ही तैयार हो गए थे,पूरी लंका को तहस-नहस कर दिए,लाखों राक्षसों का वध कर दिए,मेघनाद,कुम्भकर्ण जैसे सैकडो़ वीरों को मौत के घाट उतार दिए और अंत में महाज्यानी,प्रकाण्ड विद्वान पंडित,महा शिवभक्त त्रिलोक विजेता रावण को भी मार दिए..सिर्फ़ एक औरत के लिए..!!कितना पापी और हिंसक थे राम...और दूसरी तरफ़ देख लिजिए हमारे सत्य अहिंसा के संत को....!! पचासों लाख हिन्दुओं को कटवा दिए,कितनी ही स्त्रियों का इज्जत लुटवा दिए फ़िर भी हिंदुओं को अहिंसा के मार्ग पर चलने की शिक्षा देते रहे............!
एक और हमारे पापी हिंसक कृष्ण जो समूचे कौरव कुल का ही नाश करवा दिए...जब अर्जुन अपने दादा जी अपने गुरुजनों अपने सगे-संबंधियों और अपने भाईयों को मारना नहीं चाह रहा था..वो युद्ध छोड़कर जाना चाह रहा था..वो युद्ध जीतकर राज्य-सुख लेने के बजाय एक सन्यासी बनकर भिक्षा माँगने को तैयार हो गया था तो क्या जरुरत थी कृष्ण को १८ दिन तक गीता का उपदेश देने की..ना वो उपदेश देते ना युद्ध होता और ना इतना बडा़ नर-संहार होता..इस संहार में तो कृष्ण ने अपने भी समूल कुल-वंश का ही नाश करवा दिया..इस युद्ध से जो भारतीय संस्कृति और हिंदूओं का विनाश होना शुरु हुआ वो अब तक हो रहा है....अब आप ही बताइए उस समय अगर हमारे संत गाँधी जी का जन्म हो गया होता तो ये महा-विनाश रुक ना गया होता.....!!!!!आपलोग हों या ना हों मैं तो बहुत बडा़ भक्त हूँ गाँधी जी का...
गाँधी बाबा की - "जय"
एक बात मुझे और कहनी है आपलोगों से कि गाँधी जी जो राम-कृष्ण से बढ़कर थे वो राम-राम जपे ये तो हजम होने वाली बात नहीं है...ये उनके बेवकूफ़ भक्तों द्वारा उडा़यी गयी अफ़वाहें हैं और मरते वक्त उनके मुँह से "हे राम" निकला था ये भी उनके अज्यानी भक्तों द्वारा गढी़ गयी मनगढंत बातें हैं...जो खुद भगवान से बढ़कर हो उसे भला मौक्ष की क्या जरुरत जो मरते वक्त वो भगवान का नाम लेंगे..वो भी राम और कृष्ण जैसे हिंसक पापी का..!!!मुझे तो पूरा विश्वास है कि उनके मुह से निकला अंतिम शब्द "हे राम" नहीं बल्कि "हाय मियाँ" रहा होगा क्योंकि उन्हें हर पल मुसलमानों के भले की ही चिंता लगी रहती थी..उनकी हर धड़कन बस इनके लिए ही धड़का करती थी.......
उनका दिल भले ही मुसलमानों के लिए धड़कता रहे पर इस लेख में मैंने साबित कर दिया है कि वो राम-कृष्ण से बढ़कर थे..राम-कृष्ण हिंसक थे जबकि वो शांतिप्रिय और अहिंसा-प्रेमी थे..उनके दिल में प्रेम का सागर तो इतना उफ़ान मारता था कि अपने दुश्मनों को भी भिंगोकर सराबोर कर देते थे.....इसलिए सब हिंदुओं को चेता रहा हूँ कि आपलोग भी मेरी तरह राम-कृष्ण जैसे पापी की भक्ति छोड़कर गाँधी जी के भक्त या अनुयायी(अनुयायी मुस्लिमों और ईसाईयों के नियम से जैसे वो लोग ईसा और पैगम्बर के अनुयायी हैं))बनो वर्ना सीधे नरक में जाने के लिए तैयार रहो........................!

23 टिप्‍पणियां:

  1. अपने प्यारे भारत को स्वर्ग से भी सुंदर और जाने क्या क्या बनाने की बात कर रहे हैं किन्तु इस लेख में तो मुझे सब कुछ नकारात्मक ही दिखाई दे रहा है. मैं इस बात पर कोई बहस नहीं चाहता की ये सब बातें सच हैं या कल्पना लेकिन इतना तो आप भी मानेंगे की गाँधी जी के जीवन से हम काफी कुछ सकारात्मक भी सीख सकते हैं.

    ऐसे में इस विषय पर इतना बड़ा लेख लिख कर आपने अपनी काम कल्पनाओं का परिचय देने के आलावा कोई सृजनात्मक कार्य नहीं किया है.

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  2. विश्वास तो मुझे भी नहीं होता अभिषेक लेकिन जिस व्यक्ति ने भारत को एक ऐसी भयानक रोग लगा दी जिसका इलाज लगभग असंभव है और भारत उस बीमारी से घुट-घुट कर मरने को विवश है तो वो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है..गाँधी के बारे में शायद आप नहीं जानते हो नहीं तो आपको इतना आश्चर्य नहीं होता...अगर जानना है तो "गाँधी-वध" पुस्तक पढ़ लिजिए.अगर कहेंगे तो मैं उनपर एक और ब्लाग लिख दूँगा लेकिन जिसे लोग देवता की तरह पूज रहे हैं उस पर एक ही बार ज्यादा लिख दूँगा तो लोगों की नजर में मैं ही बुरा बन जाउँगा..

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  3. awyaleek ji ! thanks for this really finest article on that fake Father of the nation !

    If he is our father of the nation then what about all the God which we love & prayer daily , what abt Swamy Vivekananda, Maharana Pratap Singh ji , Pruthvi raj Chauhan, Bhagat Singh, Shri Krishna Which is The father of all creatutre in world.

    See here for more article.....
    http://www.facebook.com/note.php?note_id=121742137883153

    एक "राष्ट्र-पिता" का मुल्यांकन
    http://www.facebook.com/topic.php?uid=145258605504787&topic=150

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  4. @ benami..agar bharat ko swarga se sunder banana hai to ismein jo kachra pada hai woh hatana jaruri hai....Ghar ka decoration karne se pahele use saaf karna jaru ri hota hai...isiliye to ham bhi mandir jane se pahle nahate jarur hai...

    Avyaleek : aapka kam behad sarahniya hai..asha hai aap isi tarah apne kaam se desh ko sudharne mein madad karenge...
    aapke kaam mein ham log aapke saath hai..

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  5. एक रंगीला बुड्डा जो भारत को बर्बाद कर मर गया ....

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  6. मरा कहाँ था,मारना पड़ा था इसे तो।

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  7. mere dosto aur bhaiyo
    aap bataye aapne is desh ko kya diya hai
    dusro ko gaali dena bahut aasan hai lekin khud desh k liye kuch karna bade saahas aur himmat ki baat hai .

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  8. नमस्कार ! बहुत अच्छा लेख है। धन्यवाद। गान्धी ने लेली देश की। पाकिस्तान बनाया मुसलमानो के लिये। हिन्दुसतान में रखने की क्या अावश्यकता थी फिर?

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  9. Prabhu shri Ram unsab vyaktiyo ka bhala kare jinhone yah post banaya hai kyoki vah bhatke hue hai koi bhi kisi ke bare me kuchh bhi likh dega toh vah kya maan lenge....usa me Swami vivekanand ji ke pichh bhi kuchh log pade hue the unhe nicha dikhan ke liye..jaise yah log kar rahe hai...
    jarur Gandh ji ne koi bahut bada punye ka kaam kiya hoga jiske karan unhe itna mahan karye mila tha ahinsa ka marga jo jesus ko mila tha.....
    Gandhi ji desh ke achhe logo ke liye adarsh hai aur rahenge.......jaise Bhagat Singh adarsh hai...desh ke krantikariyo ne bhi unpar ungli nahi uthai toh yah barsati maindak tar tar kar rahe hai toh koi baat nahi sirf kuchh din ke maindak hai...God bless them...jai shri Ram...

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  10. Prabhu shri Ram unsab vyaktiyo ka bhala kare jinhone yah post banaya hai kyoki vah bhatke hue hai koi bhi kisi ke bare me kuchh bhi likh dega toh vah kya maan lenge....usa me Swami vivekanand ji ke pichh bhi kuchh log pade hue the unhe nicha dikhan ke liye..jaise yah log kar rahe hai...
    jarur Gandh ji ne koi bahut bada punye ka kaam kiya hoga jiske karan unhe itna mahan karye mila tha ahinsa ka marga jo jesus ko mila tha.....
    Gandhi ji desh ke achhe logo ke liye adarsh hai aur rahenge.......jaise Bhagat Singh adarsh hai...desh ke krantikariyo ne bhi unpar ungli nahi uthai toh yah barsati maindak tar tar kar rahe hai toh koi baat nahi sirf kuchh din ke maindak hai...God bless them...jai shri Ram...

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  11. gandhi aur nehru dono ek hi theli ke chate batte thhe.dono shaukin thhe.shayad nehru gandhi ki in kamjorion ke karan unhe blackmail karte thhe. issi karan nehru gandhi ki kamjori thhe.
    gandhi ne jabardasti nehru ko desh par pradhanmantri ke roop me thhopa thha jiske liye unhone desh ka batwara bhi savikar kar liya.

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  12. गांधीजी की पूरी सच्चाई जानने के लिए पढ़ें- भारत- गाँधी नेहरु की छाया में

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  13. अव्यालिक जी,
    इस तरह के लेख की शुरुआत करने के लिए धन्यवाद |
    मैं बहुद दिनों से सोच रहा था इस विषय पर लिखने को |
    पर काफी पुस्तकों के नाम के साथ प्रस्ठ शंख्या देनी आवश्यक हैं इस लिए रुका हुआ था |
    गाँधी नेहरु और विवेकानंद जैसो की पोल खोलनी हो तो पुस्तकों के प्रमाण देना आवश्यक है वो भी उन्ही के समर्थकों की याँ उनकी खुद की | तो इस विषय पर गंभीर पुनर्लेखन अभी आवश्यक हैं |

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  14. एक रंगीला बुड्डा जो भारत को बर्बाद कर मर गया ....

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  15. This article is truth. If anybody wants to know about Gandhi then read "Gandhi Vadh & Panchavan Kotinche Bali"

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  16. wtf is this ?
    r u insane ?
    u people r sick.

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  17. this is really a nice artical ... we know about the fakeness of gandhi , nehru...bt this one is really a big jolt for those who takes gandhi as a nation father.... very nice blog...

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  18. avyalik ji,es lekh ko turant smapt kare.(krodh se), apane gandhi ji ke bare bahut galat likha hai, apako unake bare bahut parane ki jarurat hai.

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  19. बहुत सही जानकारी दी है आपने...ऐसे ही गांधियो की वजह से आज हम आगे नहीं बढ़ पा रहे है...नहीं तो हिंदुस्तान को गुजरात जैसे विकसित बनाने में कितना टाइम लगने वाला है...!!

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  20. Dear Awyaleek सच्चाई से अवगत करने क लिए धन्यवाद, लेकिन इस देश में कोई भी पार्टी या नेता एसा नहीं है जो इस बात को सामने लाकर इस जेसे कमीने से महानता का पद ही छीन ले . पर हम आशा करते है इस देश क नागरिको से की वो ही इन बातो को समझे और अच्छे लोगो क लिए अपने दिल में हमेशा जगह बनाये रखे. पुनह धन्यवाद.
    जय हिंद ,जय हिंदुत्व

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  21. KHUD TO MARR GAYE LEKIN SALA BUDHDHA BHARAT OR NEXT GENRATION KE LIYE DUKH DE GAYA SALA KUTTE KA BEEJ IS GANDHI PARIWAAR NE HI SURU SE HI BHARAT KO KHOKLA KIYA HAI PAHLE IS BUDHDHE NE OR AB SONIYA NE.

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  22. मैं आजाद भारत के शिल्प कार के बारे में क्या सुन रहा हूँ ना बाबा
    विस्वास नही हो रहा है हा झिया कुत्ते के वजह से भारत का विभाजन हुआ लाखों मुसलमानों की जाने गई कई हिन्दू भाई बेघर हो गए

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