गुरुवार, 25 नवंबर 2010

मुसलमानों का लिंग कटा क्यों...?एक अनकहा सत्य.!

मुसलमान लोग अपने लिंग के कटने के लिए जो भी कारण देते हों पर एक कारण जो सबसे महत्त्वपूर्ण है जिसपर अभी तक शायद किसी का ध्यान नहीं गया है वो कारण मैं बताना चाहता हूँ..
हिंदु लोग शिवलिंग को पत्थर की आकृति में भगवान शिव समझकर पूजते हैं.उन्हें इस बात का पता नहीं होता कि वो लिंग की पूजा कर रहे हैं पर हरेक मुसलमानों को ये बात अच्छी तरह पता है कि वो पत्थर लिंग है..ठीक है पता है तो अच्छी बात है पर इसी लिंग की पूजा जो काबा में करते हैं ये,जिसे ये सहलाते हैं और चूमते हैं,उस लिंग को इन्होंने सही-सलामत नहीं रखा है..उस लिंग को काट अर्थात तोड़-फोड़ दिया है तथा आधे-अधूरे टूटे-फूटे लिंग को चाँदी के पत्तर तथा कीलों से ठोंककर किसी तरह रखा है इन्होंने वहाँ..अब बताइए कि ऐसी स्थिति में शिव जी को इनलोगों पर गुस्सा आना स्वभाविक है या नहीं..!!.?
और उनके लिंग को क्षत-विक्षत करने का पाप तो किया ही उसके साथ-साथ शिव जी का लिंग कैसे कटा और वो लिंग के रुप में क्यों पूजे जाते हैं इस बात की ये झूठ-मूठ कहानी बनाकर फैलाते रहते हैं जबकि वास्तव में शिव जी का शिवलिंग के रुप में पूजने का उनके लिंग कटने से कोई सम्बन्ध नहीं है..अब बताइए क्या शिव जी का कर्त्तव्य नहीं बनता है इन्हें सबक सिखाने का...?बेशक बनता है...आखिर पाप करने की भी सीमा होती है..पाप का घड़ा भर जाने पर तो दण्ड मिलना विधि का विधान है सो दे दिया शिव जी ने इन्हें दण्ड....
पर ध्यान देने वाली बात ये है कि इसके जिम्मेदार खुद मुसलमान ही हैं..इनलोगों की तोड़-फोड़ की प्रवृति ही इन्हें इस अवस्था तक ले आई है..अगर इनमें विध्वंश की प्रवृति ना होती तो ना ही काबा का शिवलिंग का आकार आधा होता और ना ही इनका लिंग...

4 टिप्‍पणियां:

  1. @ भाई अव्यालीक जी ! विस्तृत उत्तर दोबारा देने के बजाय आप पूर्व में लिखे मेरे शब्दों को आपने संतों को दिखाएँ और वो जो गलती उसमें बताएं , आप मुझे उससे आगाह करें ताकि मैं आपने विचारों में सुधार कर सकूँ .
    २- आप वीर हैं , आप मुसलमानों का समूल नाश करने कि शक्ति रखते हैं तो भला मेरी क्या औकात है आपके सामने , आप शौक़ से इनका विनाश कर दीजिये और फिर जैसा पतन भारत का महाभारत के बाद हुआ उसे सहन करने के लिए भी तैयार रहिये क्योंकि कोई भी युद्ध विनाश के सिवाय कुछ नहीं लाता .
    ३- गालियाँ बकना कौन सा संत सिखाता है . गाली तो आसाराम जी भी नहीं देते . अगर आप इस एक बात को भी कमी नहीं मानते तो फिर मैं आपको और कमियां बताकर क्या करूं ?
    ४- गीता का दर्शन वेद के एकदम विपरीत है . वेदों में सकाम योग है जबकि गीता में निष्काम योग है . मूल वेद ही है , गीता नहीं .
    धन्यवाद .

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  2. be vedik. you write good.. but purano ki vichardhara rakhete ho read agniveer.com brother.. ur title was good but i didnt found any logical reason that i read in another articles about khatna the illness of mohhmad thoughts well.. i hope you will give some good..

    namaskar

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  3. एक बात तो है कि यह साइट जिसकी भी है वह बहुत बड़ा मादरचोद और ढोंगी है तभी तो लंड और बुर पूजने की वकालत कर रहा है

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