सोमवार, 22 नवंबर 2010

हिंदु और मुसलमान(hindumiya)

चूँकि मुहम्मद साहब खुद हिंदु थे,उनका पूरा खान्दान भी हिंदु था इसलिए उन्होंने जब अपना नया मुसलमान धर्म बनाया तो अपने सारे नियम-कानून हिंदु-धर्म के विपरीत कर दिया उन्होंने,भले ही वो मानवता के अहित में ही क्यों ना हो.कुछ तो उन्होंने किया और कुछ तो अपने-आप हो गए.कुछ नियम तो काफी हास्यास्पद भी हैं लेकिन उनपर ईस्लाम को हिंदु से श्रेष्ठ साबित करने का इतना जुनून सवार था कि सारी सीमाएँ ही तोड़ते चले गए वो..इसलिए सिर्फ मर्यादाओं को तोड़ना ही इस्लाम धर्म का उद्देश्य बनकर रह गया.नियम को उल्टा करने का एक प्रमुख कारण उनका डर भी था.चूँकि वो जन्मजात हिंदु थे इसलिए अपने आप को हिंदु से अलग साबित करने के लिए पूर नियम ही उल्टा कर दिया.
अब कुछ बिन्दुओं पर दृष्टिपाद करिए और अंदाज लगाईए कि कितने विपरीत है दोनों धर्म.-
{{क}} पुराण और कुराण -सबसे पहले धर्म-ग्रंथों के नाम ही बिल्कुल उल्टे हैं और यहीं से सब कुछ उल्टा होना शुरु हुआ..अब स्पष्ट है कि अच्छा का उल्टा करना हो तो बुरा ही करना पड़ेगा कुछ और तो कर नहीं सकते.इस कारण जो थोड़ी बहुत बुराईयाँ थीं हिंदु धर्म में वो तो अच्छाई बनकर इनके धर्म में आ गई पर हिंदु धर्म अच्छाईयों से भरी पड़ी थीं इसलिए उसको उल्टा करने के चक्कर में बुराईयों से भर लिया इन्होंने अपने धर्म-ग्रंथों को..ध्यान दीजिए कि "कु" उपसर्ग हमेशा किसी धातु को बुरा बनाने के लिए लगया जाता है जैसे रुप का कुरुप,कुकर्म,समय का कुसमय,इसी प्रकार कुलंगार,कुलच्छिणी,कुसंगत आदि.
विचार तो उल्टे हैं ही इनके सारे रीति-रिवाज और क्रिया-कलाप भी उल्टे--
हिंदु लोग अपने बच्चे का जन्म के ३ साल पश्चात मुण्डन संस्कार करवाते हैं जिसमें सर के अशुद्ध बाल को छीलकर उसे साफ कर देते हैं लेकिन ये अपने तीन साल के बच्चे का लिंग छीलकर छिलन-संस्कार करते हैं जिसमें स्वच्छ त्वचा को हटा दिया जाता है जो बच्चे के कोमल लिंग की रक्षा करने के लिए होता है वहाँ पर,और लिंग को खुला छोड़ दिया जाता है गंदा होते रहने के लिए.यहीं से मुस्लिम बच्चों के अंदर मार-काट और कुंठा की भावना का जन्म होता है..ये बात इतनी छोटी नहीं है जितने प्रतीत होती है.ध्यान देने वाली बात ये है कि हिंदुओं का ध्यान शरीर के मस्तिष्क यानि सबसे उपरी भाग पर केंद्रित होता है जिसके कारण वो उन्नति के मार्ग पर अग्रसर रहते हैं जबकि मुस्लिमों का ध्यान शरीर के सबसे निचले भाग लिंग पर केंद्रित होती है जिस कारण ये अवनति के पथ पर अग्रसर रहते हैं..हिंदु अपने मन को शुद्ध-पवित्र कर अपने ध्यान को एक बिंदु पर केंद्रित करने लायक बनाते हैं ताकि वो आत्म-साक्षात्कार कर सके पर हमारे मुसलमान भाई अपना सारा ध्यान संभोग पर ही केंद्रित रखते हैं और सारा जीवन संभोग करते-करते और बच्चे पैदा करते-करते ही बिता देते हैं..सुना है इनके पैगम्बर साहब भी संभोग करते-करते ही मर गए थे..और इन्हें जिस स्वर्ग का लालच देकर आत्म-घाती बम तक बनने के लिए मजबूर कर दिया जाता है उस स्वर्ग में भी इन्हें संभोग और मांस-भक्षण का ही लालच दिया जाता है..
कितना विशाल अंतर है दोनों धर्मों में -जहाँ हिंदु धर्म में शारीरिक सुख त्याज्य,घृणा और सबसे निचले स्तर का सुख है वहीं मुसलमान भाईयों के लिए यह परम और अंतिम सुख है.हिंदुओं की बातें स्वर्ग और नर्क से शुरु होती हैं पर मुस्लिम भाईयों की बातें यहीं आकर खत्म हो जाती हैं...
हिंदु अगर सूक्ष्म बातों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं तो ये स्थूल बातों पर..हिंदु अगर मानसिक और आत्मिक सुख की बात करते हैं तो ये शारीरिक सुख की...
चलिए सूक्ष्म बातें बहुत हो गई अब कुछ स्थूल बातें करते हैं......
{{ग}}हिंदु मर्द मूँछों को अपनी शान समझते हैं इसलिए उसे बढ़ाते हैं तथा दाढ़ी को साफ कर देते हैं पर हमारे मुसलमान भाई मूँछों को ही साफ कर देते हैं तथा दाढ़ी को शान समझकर रख लेते हैं ..यहाँ भी मैं यही कहूँगा कि इन्होंने निचले भाग को प्राथमिकता दी..
{{घ}}हिंदु गौ-पूजा करते हैं पर ये गायों को हत्या करते हैं वो भी बकरीद के दिन..क्योंकि बकरीद अर्थात बकर+ईद.अरबी में गाय को बकर कहा जाता है और ईद का अर्थ पूजा होता है.ईद संस्कृत शब्द ईड से बना है जिसका अर्थ पूजा होता है..अब बताइए जिस दिन इन्हें गाय की सेवा करके पुण्य प्राप्त करना चाहिए उस दिन ये गाय की हत्या करते हैं..
{{ङ}}हिंदुओं के लिए स्वच्छता का अर्थ जहाँ पूरे शरीर की शुद्धि के साथ-साथ मन की शुद्धि होती है वहीं इनके लिए शुद्धता का अर्थ सिर्फ लिंग को पेशाब करने के बाद मिट्टी के ढेले या ईंट के टुकड़े से घिस लेने भर से है और ध्यान देने वाली बात ये है कि ये मिट्टी के ढेले या ईंट के टुकड़े बहुत ही गंदे होते हैं क्योंकि ये पेशाब करने के जगह के आस-पास से ही उठाए जाते हैं...जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि इनका पूरा ध्यान जीवन भर सिर्फ लिंग पर ही केंद्रित होता है इस बात का ये बहुत ही हास्यास्पद और दुःखद उदाहरण है कि इनकी नजर में हिंदु नापाक और मुसलमान पाक होते हैं सिर्फ इसलिए कि मुसलमान पेशाब के बाद लिंग को मिट्टी से घिस लेते हैं और हिंदु नहीं घिसते इसलिए..बाँकी ये पखाने के बाद अपने गुदा को ना भी धोयें तो कोई बात नहीं,गुदा अगर धो भी लिया है तो हाथ को मिट्टी या साबुन से नहीं भी धोयें तो कोई बात नहीं,सप्ताह भर ना भी नहायें तो कोई बात नहीं--ये पाक हैं क्योंकि अपने लिंग को मिट्टी से घिसते हैं पर हिंदु बाँकी कोई भी स्वच्छता अपना ले वह नापाक है सिर्फ इसलिए कि उसने पेशाब के बाद अपना लिंग नहीं घिसा...कितनी मूर्खताभरी बातें हैं ये..
एक और बातें मुझे एक व्यक्ति ने बताई थी जो भौतिकी के बहुत ही विद्वान शिक्षक तो थे ही एक बहुत ही अच्छे तथा समझदार इंसान थे..वो वजू के बारे में बता रहे थे कि शुद्ध होने के लिए ठेहुने से नीचे पैर को धोना चाहिए,केहुनी से नीचे के हाथ वाले भाग को और गर्दन से उपर वाले भाग को.बस हो गए तैयार नवाज पढ़ने के लिए..यहाँ तक तो ठीक है लेकिन इसके बाद जो उन्होंने कहा उस बात पर मैं अपने आपको हँसने से नहीं रोक सका..आगे उन्होंने कहा कि अगर अपानवायु छूट जाय तो वजू टूट जाता है और उसके बाद फिर से ये उपर बताई गई विधि अपनानी होगी..अब बताईए हवा अगर कमर के नीचे से निकले तो उससे ठेहुना के नीचे पैर वाला हिस्सा और केहुनी के नीचे का हाथ वाला हिस्सा धोने का क्या तुक बनता है.....
अफसोस कि ऐसी बेतुकी बातें ईश्वरीय वाणी कहलाती हैं..
{{च}}मुसलमान धर्म अज्यानता के आधार पर ही टिका हुआ है जबकि जबकि हिंदु धर्म का अधार सिर्फ ज्यान है..एक उल्लेखनीय बात ये है कि मुसलमान लोग इसलिए कुरान और पैगम्बर पर इतनी श्रद्धा रखते हैं क्योंकि वे अज्यान हैं उन इतिहास से जो इस्लाम के शुरुआत से ठीक पहले का है यनि मुहम्मद के पहले का इतिहास..अगर सच्चा इतिहास पता चल जाय इन्हें तो नफरत हो जाएगी मुहम्मद से....ये क्या कल्पना कर लिया मैंने.! अब तक तो मुहम्मद जी ने सारे मुसलमानों का इस तरह ब्रेन-वाश कर दिया है कि खुद खुदा भी पृथ्वी पर आकर कहे कि मुहम्मद मेरा भेजा हुआ पैगम्बर नहीं था तो ये उस खुदा को ही मा-बहन करना शुरु कर देंगे..अब तो शायद खुदा को भी हिम्मत नहीं होती होगी इन्हें सही रास्ते पर लाने की..
{{छ}}योग और वियोग..हिंदु का ध्यान योग पर केंद्रित होता है यानि जोड़ने में जबकि इनका ध्यान तोड़ने में केंद्रित होता है..हिंदु भगवान की पूजा करने के समय अपने दोनों हाथों को जोड़ लेते हैं जबकि ये दोनों हाथों को फैला लेते हैं..यहाँ भी लालच..भगवान के पास सिर्फ माँगने के लिए ही जाते हैं..
{{ज}}हिंदु त्याग और तपस्या की बातें करते हैं तो ये लूटने-हथियाने की और मजे लूटने की..हिंदु नारियों की हमेशा इज्जत करते हैं और युद्ध में भी ये उन्हें अलग ही रखते हैं जबकि युद्ध में इनका मुख्य हमला स्त्रियों पर ही होता है और उनका इज्जत लूटना इन्हें स्वर्ग का मार्ग ले जाने वाला बतलाया गया है.
{{झ}}हिंदु के अनुसार सभी जीवों{मानव तथा जंतु} में परमात्मा का अंश होता है अतः सबसे प्यार करना चाहिए पर इनके अनुसार गैर-मुसलमान बस मारने-काटने और सताने के भागी हैं..
{{ञ}}हिंदु के अनुसार सभी बुरे कर्मों का फल भोगना होगा पर बाईबिल और कुरान के अनुसार जो इन दोनों ग्रंथों पर विश्वास करेगा बस वही स्वर्ग का राही है जिसने अविश्वास किया वो नर्क का..इन धर्मों में आ जाने से सब पापों से मुक्ति..यनि करना धरना कुछ नहीं बस इन पुस्तकों को ईश्वरीय पुस्तक मान लो और प्राप्त कर लो कुकर्म करने का लाइसेंस...
एक तरफ ये भगवान को सर्वशक्तिमान तो मानते हैं लेकिन ये भी मानते हैं कि भगवान को साकार रुप धारण करने की शक्ति नहीं है यनि जो हमेशा अदृश्य रहे वही सर्व-शक्तिमान ईश्वर हो सकते हैं अगर उन्होंने साकार रुप धर लिया तो वे भगवान हो ही नहीं सकते...एक और बड़ा अंतर....
{{ट}}हिंदुओं के भगवान खुद मानवों के बीच आते हैं अवतार लेकर ताकि मानवों को जीने का सही मार्ग सीखा सकें उनके सामने एक आदर्श रख सकें तथा मानवों का भगवान पर श्रद्धा-विश्वास और प्रेम बढ़ सके पर इनके अल्लाह को खुद इनके बीच आने की हिम्मत नहीं है इसलिए एक दलाल को भेज देते हैं..या तो इनके अल्लाह बहुत डरपोक हैं या फिर इनसे प्रेम करते ही नहीं...
{{ठ}}हिंदुओं के अनुसार स्वर्ग-नरक को भोग लेने के बाद फिर इस संसार में आना ही होगा जबतक कि आत्म-ज्यान प्राप्त नहीं हो जाता लेकिन इनके अनुसार अगर एक बार स्वर्ग पहुँच गए(चाहे आत्म-घाती हमलावर बनकर सैकड़ों लोगों की जान लेकर ही सही))तो बस सारी चिंता खत्म,अनन्त काल के लिए सुख भोगते रहो और अगर ना पहुँच सके तो नर्क में जाकर अनन्त काल के लिए दुःख भोगते रहो...
अब यहाँ थोड़ी देर रुक कर विचार करिए कि इस तरह अनन्त काल तक का स्वर्ग-नरक वाला सिद्धान्त जो इतना डरावना है तो क्यों ना स्वर्ग जाने के लिए लोग कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाएँगे और उसपर भी स्वर्ग जाने के लिए काम तो देखिए इनका जो मुसलमान नहीं हैं उसे अपना शत्रु समझो और उसकी हत्या करो भले ही वो तुम्हारे मा-पिता ही क्यों ना हों..तो बताइए कि इस तरह की शिक्षा हिंसा और अशांति फैलायेगी कि नहीं और इसके बाद भी इस तरह के जितने ज्यादा कर्म तुम करोगे उतनी ज्यादा सुख अर्थात उतनी ज्यादा हूरें मिलेंगी स्वर्ग में यनि सिर्फ लडकियों के लिए इतनी हिंसा...अगर मैं मुसलमान होता तो नर्क जाना पसंद करता लेकिन इस तरह के काम करके स्वर्ग जाना पसंद नहीं करता...
{{ड}}हिंदु धर्म सोचने-समझने की पूरी स्वतंत्रता देता है जबकि मुसलमान धर्म ये सारी आजादी छीन लेता है..कुराण के किसी बात पर अविश्वास कर लेने या मुहम्मद पर अविश्वास कर लेने भर से नरक....बताईए इतनी छोटी सी बात के लिए इतनी बड़ी सजा..
लिखते तो उल्टा हैं ही सुना है कि ये संभोग भी उल्टा ही करते हैं यनि आगे के बजाय पीछे से.जानवरों की तरह..सारे जानवर तो पीछे से करते ही हैं पर ये उनकी विवशता है..भगवान ने मनुष्य को जानवरों से अलग बनाया और लिंग को आगे रखा ताकि दोनों एक-दूसरे के सामने रह सके लेकिन उल्टा करने के चक्कर में.........
हिंदु बाँयें से दाँयें बढ़ते हैं.चूँकि बाँया भाग दाहिने भाग की तुलना में कमजोर होता है और बाँयें तरफ दिल होता है इसलिए जो भी लिखा जाता है वो दिल से और बाँयें से दाँयें जाने का अर्थ होता है विकास की ओर अग्रसर परंतु ये दाँयें से बाँए की ओर चलते हैं यनि उन्नति से अवनति की ओर..
चूँकि लिखना एक कला है और कलाकारी को नाजुक हाथों से प्यार से की जाती है इसलिए कागज पर लकीरों को खींचा जाता है(ऐसा कभी नहीं कहा जाता कि रेखा ढकेलो,हमेशा शिक्षक बच्चों को यही कहते हैं कि रेखा खींचो),ढकेला नहीं जाता क्योंकि ढकेलने में शक्ति का प्रयोग करना पड़ता है और शक्ति का प्रयोग कला को बिगाड़ सकता है बना नहीं सकता..इसलिए तो इनके धर्म में कलाकारी करना गुनाह है...उर्दू-फारसी लिखते भी हैं तो ढकेल-ढकेलकर..इसलिए देखने में भी ऐसा लगता है जैसे २-३ साल के बच्चे के हाथों में कागज-कलम पड़ गया हो और उसने कौआ-मैना उड़ने का खेल खेल लिया हो...
मुसलमान धर्म की आधार-शीला ही दुश्मनी पर रखी गई थी इसलिए दुश्मनी निकालने के लिए हरेक चीज को ही उल्टा कर दिया इन्होंने..पूरब को पश्चिम कर दिया.लोग बर्त्तनों को अंदर से कलई करवाते हैं तो ये बाहर से,टोपी की सिलाई भी इनकी उल्टी होती है,चूल्हे पर तवा भी उल्टा रखते हैं,परिक्रमा भी उल्टी दिशा में करते हैं,हिंदु माला की मोती को उपर से नीचे सरकाते हैं तो ये नीचे से उपर..यनि यहाँ भी ढीठता...लोग हाथ-पाँव धोते समय पानी को उपर से नीचे की ओर गिराते हैं तो ये नीचे से उपर की ओर यनि ये तलहस्त को उपर कर पानी को बहाते हैं.हिंदु या तो भूखे रहकर उपवास रखते हैं या फल खाकर पर ये पेट भरकर उपवास करते हैं वो भी मांस खाकर..हमलोग शिवलिंग को नीचे रखते हैं तो इन्होंने दीवार में चिनवा दिया है..शुक्र है कि उपर छत में लटका नहीं दिया है..अगर सम्भव होता तो वो भी कर लेते ये..चूँकि उसे छूना और चूमना पड़ता है इसलिए इसे छत से लटकाने के बजाय दीवार में चिनवा दिया नहीं तो........
इस्लाम का सीधा-साधा नियम ये है कि अन्य से अपना अलग अस्तित्व,विरोध,चिढ़ और शत्रुता कायम रखने के लिए आम लोग जो करते हैं उसका उल्टा करना..चूँकि ईसा और ईस्लाम के पूर्व पूरे विश्व में वैदिक यनि हिंदु संस्कृति ही व्याप्त थी इसलिए इनकी सारी दुश्मनी हिंदुओं से ही थी..इसका एक उदाहरण है कि एक बार एक इस्लामी सम्पादक को एक मुसलमान का पत्र मिला जिसमें उनसे पूछा गया था कि हिंदु अगरबत्ती जलाते हैं तो मुसलमान को जलाना चाहिए या नहीं तो उस सम्पादक ने भी यही उत्तर दिया कि उसे इसका उत्तर समझ में नहीं आ रहा है लेकिन चूँकि हिंदु जलाते हैं इसलिए मुसलमान को नहीं जलाना चाहिए..
हिंदु और मुसलमान के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि हिंदु का अर्थ भारतीय होता है जबकि मुसलमान का अर्थ भारतद्रोही..
चूँकि भारत एक हिंदु बहुसंख्यक देश है इसलिए इनकी प्रीति भारत के प्रति कभी हो ही नहीं सकती..इनकी प्रीति हमेशा अरब या मुस्लिम देशों के प्रति होती है....इक्का-दुक्का मुसलमान को छोड़ दिया जाय तो भारत के सारे मुसलमान देश-द्रोही हैं जिनके दिल में भारत के लिए नहीं पाकिस्तान के लिए प्यार बसता है..यही है इनका धर्म जो अपने देश के साथ गद्दारी करने की सीख देता है..दुःख होता है कहते हुए लेकिन भारत में ही भारत के लाखों दुश्मन पल रहे हैं...हिंदु और मुसलमान में एक अंतर ये भी है कि हिंदु सिंह की तरह निडर और साहसी होते हैं इसलिए अकेले बस अपने परिवार के साथ रहना पसंद करते हैं जबकि मुसलमान डरपोक होते हैं जो लाखों करोड़ों के झुण्ड बनाकर रहते हैं फिर भी उनका डर खत्म नहीं होता और झुण्ड बढ़ाने में लगे रहते हैं और बच्चे पैदा करते रहते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि एक अकेला शेर ही भारी पड़ जाएगा उस झुण्ड पर...
कौरव सौ भाई ही सही पर उनपर पाँच पाण्डव ही भारी थे.कौरवों के पास कृष्ण की लाखों की सेना ही सही पर एक निहत्था कृष्ण ही भारी थे..
पूरा विश्व मुसलमानों से भरा ही क्यों ना हो अकेला भारत ही काफी है पूरी दुनिया के लिए...
एक महाभारत हुआ था दो भाईयों के बीच और उसके बाद कलियुग की शुरुआत हुई थी, उसीप्रकार एक और महाहिन्दुस्तान होने की संभावना दिख रही है जिसके बाद अंत होगा कलयुग का और सतयुग आएगा..

28 टिप्‍पणियां:

  1. पूरा विश्व मुसलमानों से भरा ही क्यों ना हो अकेला भारत ही काफी है पूरी दुनिया के लिए...
    एक महाभारत हुआ था दो भाईयों के बीच और उसके बाद कलियुग की शुरुआत हुई थी, उसीप्रकार एक और महाहिन्दुस्तान होने की संभावना दिख रही है जिसके बाद अंत होगा कलयुग का और सतयुग आएगा.
    Kash yah jaldi ho jaye.. Taki hamari agli pidhi sukh aur shanti purna jeevan bita sake.

    badhai ho awyaleek ... tumne kafi achchha likha hai.. isi tarh likhte raho aur dusron ki aankhe kholte raho..

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  2. वैसी ही परिस्थिति तो अभी भी है अजय जी..जिस तरह कौरव पाण्डवों का हिस्सा हड़पते जा रहे थे और पाण्डव देते जा रहे थे पर अंत में पाँच गाँव तो दूर सूई की नों के बराबर भी जमीन देने से इन्कार कर दिया इन्होंन ठीक वैसा ही दुष्ट वाला काम ये मुसलमान कर रहे हैं.मुझे तो ये मुसलमान कौरवों से भी ज्यादा दुष्ट लग रहे हैं..अगर महाभारत की कहानी को याद करिए और वर्त्तमान के बारे में सोचिए तो आपको ये मुसलमान कौरव की जगह और हिंदु पाण्डव की जगह खड़े नजर आयेंगे..

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    1. Kaal badal gaya samay badal gaya log badal gaye abki baar pridam bhi badal jayega.

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  3. kripya musalman ko musalman hi rehne dain. hamara bhae shabd prayog karna apna apmaan karna hae

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  4. कमाल है अव्यलिक भाई...बहुत जबरदस्त जानकारी दी आपने..मेरी हादिक बधाई स्वीकार करे...आपको बहुत बहुत बधाईया इस ज्ञानवर्धक लेख के लिए...भगवान आपको लम्बी आयु दे और स्वस्थ रखे...!!

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  5. TUM SAB CHHAKKE HO KISI MUSALMAN K SANE BOL K DIKHAO PATA CHAL JAEGA SALE MUTHHI BHAR TUMHARI ABADI TAB BHI SALON SAMJHE NAHI SARE BHAGWAN TUMHARE NAGE PUNGE DIKHE HAIN KHAYALI PULAO ME G RAHAE HO TUM SAB APNE KO SACHHA KAHTE HO TO JOR SE CHLLA K YE BAAT KISI MIYA K AAGE BOLNA . AAAJ TUM HUMSE JALTE HO

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  6. Kyaa aap samjhaa sakte hai ki aap is lekh se siddha kyaa karnaa chaahte hai? Aapne doosra Mahaabhaarat karne ki baat kahi - aapko pataa bhi hai ki kitnaa narsamhaar hogaa usse? koi achchhaa saa aur aasaan saa rasta nikaale.

    Dhanyavaad!

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  7. व्यापारी सामान खा गए
    ठेकेदार पुल और मकान खा गए
    नेता ईमान खा गए
    विधायक विधान खा गए
    मेरे देश के मुल्ले और कांग्रेसी
    मेरा हिंदुस्तान खा गए..!

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  8. इनकी बेवकूफी भरी हरकतों की यदि और जानकारी मिल सके! छोटा या ओछा पजामा, एक परात में एक दूसरे के मुंह से गिरा हुआ खाना, बासी खाना, दांत साफ न करना, पानी कम पीना, वगैरह वगैरह..

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    1. JO BHI ALLAH ESHWSR KO CHODKAR, ISLAM AUR HADIS KE NAAD KO LAGA WAH, ENSAN NAHI RAHA MUSALMAN BAN GAYA, BURA GALAT YA AAPANI GALAT BAAT PAR ADE RAHANE WALE KE LIYA EK KAHAWST HAI,. "" ENSAAN HAI YA MUSALMAN" YE KAHAWST SAHI HAI

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  9. kya alaah ne ye kha pagamber nuh se ki aap unhe jo mujh pr imaan nhi laye mujhe nhi maane unhe maar do kya ye kha ki tumhe adhikaar h ki unpr fatwa jari karo kya ye kha ki aap ki har ek baat mani jayegi aap jehaad kro unhe khatm kro ve kafir h tumhe musalmaan hone ka adhikaar dya alaah ne tumhe ye adhikaar kisne dya ki tum ye decide kro ki kon kafir h or uske sath tumhe kya krna h pagamber nuh sabse paak pavitra pagamber hue allah ke yhi karan h ki allah ne unhe apne seedhe se direct instruct kya or dekho kudrat us allah ne chuna jisne sabko pala sabko khana dya nawaja sabko is dunia me insaniyat k lye bheja ki kon nek h or kon galat ab tum insan apni galti suno tumne khud allah ki ek baat nhi suni tum khte rhe ki quran pado quran pado kya pado quran jab tum khud aone alaah bn baithe ab baat kro jess ki sabhi musalman khud ye jante ho ki mariyam ko sabse pavitra or alaah ko manne wali bataya gya h or uske putra isha ko yani jesus ko bhi pagamber ye satya h gakat nhi kyunki khud ae musalmaan apni gandi najar or ankh khol ye unhe main kh rha hu jo khud aone dharm ko bhul gye main bhut musalmaan ko jamta hu jo hinduo ko bhi bade adab se pyar krte ve bhaichare me or akaah pe bharosa rakhne walr meredosth kyi ve to mujh pr jaan luta de or main un par sharm kro pagamber jesus ko bhi alaah ne bhja dunia me shanti or prem k sandesh dene k lye lekin kya hua tumne tum us wakt bhi bure the aj bhi bure ho tum alaah k layak kabhi the hi tumne kya kya sab jante h unhe pratadit kya ve sache the unhone prem dya to tumne unhe dukh kast tumne means humanity manushya insaan ne jo aj hindu musalmaan christian krk ladayi kr rha h jesus ka naam quran me alaah ne jibrail ne khud panch baar lya h mohammad se bhi jyada baar or baar bataya ki ve mere hi bheje hue h unke dwara dye gye margdarshan pr bhi chal sakte the tum lekin nhi niyat hi nhi thi dharm k naam pr jang krni thi jo unhe jab lakdi ke khuto me keelo se thok kar luhulahaan kark khun bah rha takat nhi fir bhi hunter maar maar kr pahaad pr cross lye chadaya jaa rrha tha lekin jo log the unka dil nhi pighla kyunki unhe adesh tha ki aap inhe pathar maro tab tak jab tak ve pahaad mount chad na le ab jesus ko manne wale dhong krte h aone ko pop batakar vhi kritya us din krte h jis din ye jesus k sath hua or kya krte bhut halka cross aone hath se uthakar pahad chadte h bina hunter mare phulo ki barsat karwate hue batao ye kya baat hui ab ye baat kya jesus ne khi thi ya alaah ne ki kro nhi ye bhi thik vaise h jaise aaj ke musalman ko kha jata h ki ye gakat vo shi or musakmaan maan leta h musalmaano ne jesus k kadam pr bhi nhi chalna tha kyun jante h kyunki musalmaan ka bgatakna ab shuru hona tha tab jab parivartan hona tha ab tak thik kyunki log thik hone lge the to alaah ne kabhi kisi k madhyam se ye nhi kha ki but pratha gakat h musalmaan bade adab or shant the ve aman or shanti path k the kintu tab tak unhe musalmaan kha nhi kha jata tha aap jid bewajah lgaye baithte ho ab jab pagamber mohammed aaye to unhone

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  10. unhone dekha ki log bewajah apne apni philosophy banaye baithe unhone samjhaya tab unhe gyaan nhi tha jab ve dekh rhe the sab lekin jab ve hira mount gye gufa me rhe jibrail se mile to unhe sahi raah dikhayi gyi ab musalmaan ek baat or batao hindu bhi khte h ki mount me jakar parvato me jakar yadi aap tap karte h to apko ishwar gyan dete h khud hi dekh lo budha ho ya koi sab ka dhyan parvato se bada nata rha h to unhe alag bewajah kyun mante ho ab musalmaan ye bhi nhi sikhe isse ki ekant or uchayi pe jab insaan rhta h to use shi baat sikhayi jati h use alaah direction dete h use darshan dete h use gyan knowledge dete pagamber mohammed ko bhi di unhone khub mehnat ki bade sache man se alaah ko yad kya or dekho jo sach me bada bakshanhaar h usne use bhi shi raah di or fir jab jibrael k jariye unhone sabko margdarshan kya to virodh to log krte h nuh ji ka bhi kya gya jesus ka bhi to shanti sthapana k lye unhe ladayi ladni terms nhi bataya ja sakte h ab musalmaan ne jo khud bhi insaan h ne pagamber nuh se sikh nhi li jesus se nhi li pagamber se bhi nhi li li to kisse pagamber k yudh se ki unhone ladayi ki to hm bhi krenge ham bde nek ho aye h na hme alaah ne adhikaar dya h markat ka aap musalmaan bhayo se ek sawaal ki bakried manate ho ye batayo alaah ne pagamber sahib ko adesh dya tha kurbani ka to unhone aone bete ki kurbani dena shi smjha or badle me alaah ne baqara rakha jise sach me gaay kh sakte ho sanskrit ya hindi me lekin musalmaan bhayo ko baki ko alaah ne kab kha kurbani lene ko jo aap bhi lene lg gye amye thik vaise h apka festival tha aone maje k lye pagamber ki bhawnao k sath khel khela tha jaise pop jesus ki kurbani k sath khelte h to musalmaan bhayo ko gakat raah ab iske fir mili jab pagamber ne akhuri alvida kha mere .usalmaan bhai bataye ki kya pagamber sahib ne apne aage kisi k lye kha tha ki aap unhe mera uttaradhikar manna nhi kha tha fir musalmano ko ye adhikaar jab pagamber ne nhi dya tha quran ne nhi dya tha alaah ne nhi dya tha to apne khud kyun apna khalifa chuna galti to khud ki tumne ummad ko khalifa banaya khilafat khadi ki or fir apne man se ladne jhagadne lge or abaas ko khalifa banane walebade nek insan ali abu ko bhi abbas ne faasi chada jab ye yhi sab krne lge tge to bhala ham aage ki pidi se jo ab h unse neki ka bharosa kaise kare aap hakikat ko samajh hi nhi paye aapne hmesha gakat ka sath hi shi samjha jante h jo quraan pagamber ne di vo to aaptak pahuchayi hi nhi jaati use aaage ki pidi ne baar bar badla aap phle ye mang uthayo ki badli hui nhi parivartan wali nhi hme sachi quran jo khud pagamber sa ne likhwayi khadija k jariye vo padayo lekn ye kabhi ho nhi payega aaj aap khud bhatak gye dil se vichar krna shi lge to sudhar krna na lge to jaise apki marji jo kurban hote h dusro k lye prem ve hakikat me alaah k nek fariste hote h aap dekh sakte h guru nanak sahib ko unhe musalmaan bhi mante the unke uttaradhikariyon ne bhi

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  11. ne bhi ache logo ki raksha me muslim mughlo k jariya kitna saha or dekho musalmaan gakat instruction pata h or gakat karta h use alaah k jariye shi samjhta h or alaah shi ko shi rakhne k lye kabhi pagamber kabhi guru kabhi budha kabhi krishna kisi na kisi rup me apne faristo ko bhejte rhte h mat bhulo musalmaan kafir kafir khte khte tumne hi sikh punjabi dharm khada kya tumne alaah ki na mani pagamber ki mani khakifa banaya to baflaav ke lye guruo ne bhi khalsa banaya tum nhi rok sakte ye alaah k hath me tum apne man ki krte rgte to tumne musalmaan hokar bhi siya sunni bana dye abbaas khalifa ke ek gakat kadam ne iraan ke 92% generation ko sunni bana dye jisne khud ko khalifa banwane wale ali abu ko maar dya vo aage ki generation wale musalmaan ko kya shikayega galat kadam hamesha gakat hota h or vo allah ko bhi pasand nhi musalmaan ab sindh me aye musalmaan raja ne iran or turki arab ke adesho or pressure se sindh me rah rhe lgo ko jabran kha ki islam apna lo ab batao kya nuh ne ye kha ya kya tha kya jesus ne kya kha tha ye pagamber mohammed ye khte ya krte the ab jab bewajah log inkar kr rge the to mare jaa rhe the to unhine alaah ko yani ishwar ko yad kya to ishwar ne kha ki hm ek tay date pr ayenge or us raja ko khatm krenge log me santusti hui ab musalmaan bhai dekho sache dil ki pukaar to alaah ne suni kya kisi musalman ne suni nhi vo to markaat me lag gya tab fir ek bacha paida hua use uske maa baap ne udero laal kh kar bulaya use alaah ne bheja tha chahe musalmaan ho ho koi bhi jo alaah k naam pr galat krega use alaah bhi nhi bakshte vha k shanshah sindh me or sabhi ko us bache me ek bada admi dikhta tha joki sindhu nadi me machli fish me k upar khade h log manne lag gye shanshah be pakadne k lye log bhje to usse phle hi sab dubne lag gya shahnshah ka mahal vo khud sainik sab us bhayanak nadi or pani me dubne lge to us shahanshah molana ne dekha ki vhi balak fir se bada admi dikh rha nadi me fish ke upar khade h to molanao ne unhe alkhijr ka rebirth kha kafiyo ne muslims ne zinda peer kha kaafiyon ne aage chalkar syed shah qalandar kha hinduo me jhulelaal kha varun dev kha ab musalmaan batao agar alaah ya pagamber bhi agar yhi chahte to kya iskam ata ti kya akaah in hunduo ko bachane k lye ate alkhijr ka naam to quran me bhi ata h unhe bhi akaah ka pagamber bataya gya h unke lye fir muslim nr laal meri fat rakhiyon balan krk kavvali gayi think think and think kya shi h or kya galat h

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  12. हा हा हा हा हा बिल्कुल सही !!!

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  13. Please dont talk rubbish mr awlyeek....jab kuchh pat na ho na to uske bare me bolna nhi chahiye...ye hindi musalman ke bich jhagde karane ki sazish na krein to behtar hoga

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  14. Mai bs muslmano se ye puchna chahta hu ki aaj kahi v koi atanki ghatna hoti hai jisme hazaro log mare jate hai usko anjam dene wale musalman hi kyo hote hai kisi aur dharm ke log kyo nai kya bs islam ko hi khatra hai dusre dharmo se aur kisi dharm ko nai ..

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  15. JB mugal Hindustan m nhi tha .Tab tumlogo ki haalat buri jaise Chhotu achoot koi agar km zati h.niche zati ka. Woh mandir k sirh Nhi p nhi zata tha.wo bahar s hi hath jor k Chala Jata tha.hm insaan ko insaan hi maante h.chhot achhot Nhi mante .chhot achhot manner walo m nafrat paida Hoti hai.or ek sath khane pine s pyar Barra h.or y SB aap logo k samjh k bahar h.or jayda janne k liye 9852203369 p call ya what's up kre .Ek itihas Jo fir dohra raha h.chhot achhot k

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  16. Kuch nhi sir aap musalmaan ho ye sirf ek dharm hai or apse barabari kon karega aap bhi to hamare vansaj ho na ki jannat naje ka Rasta mai teyar hu har trh se apse baat karne ko ager aap apne kaba me hindu ko jane qn nhi dete Ager aapke kuch nhi sir bus

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  17. Mai zada much nahi janati dharm and all k bare me par muze a is a lagta h ki aisi bato we surf ek dusare k lite nafrat hi badegi...

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  18. And muze lagata h hame zindagi sirf ek bar milati h to isko is tarah waste nahi Karna chahiye aakhir ham sab insane h and ek na ek din sabko upar Jana h much nahi le Jana yaha se to aapas me manmutav kyu?

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  19. ISLAM EK GANDAGI FAILANEWALA KABILA HAI? AHHAHA NE SUBKUCH SAHI BANAYA HOGA LEKIN MOHAMAD JAISE CHAND YA SABHI PAKHANDI, SWARTHIYONE ISLAM KE NAAM PER ALLAH ESHWSR KO BADNAM KAR DIYA HAI,MOHAMAMANE AAPNI GALTIYA GUNAH
    SAHI THARANEKE LIYE HADIS KE NAAM PER KUCHBHI FALTU KI BATE LIKHWA DI

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  20. आपकी बात बिककुल सही है,
    क्योंकि कोई भी व्यक्ति जिद्दी होता है,
    जैसे मुहम्मद साहब , कुछ अलग करने के लिए उसके माँ बाप समान चाचा चाची को ...उसके द्वारा बनाये गए इस्लाम धर्म को न अपनाने पर .. उसने मार डाला ...

    तो
    ये सब एक पागल और असभ्य इंसान ही करता है...
    अगर किसी पागल के पास कुछ ज्यादा पागलपन हो तो,
    अब मुहम्मद साहब बनकर हमको दिखाए...


    R सुखदेव धीमान

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