मंगलवार, 28 दिसंबर 2010

एक मांसाहारी व्यक्ति कभी देशभक्त नहीं हो सकता।

मांसाहारी व्यक्ति मांस खाने के लिए यह तर्क देते हैं कि मनुष्य को भगवान ने सर्वाहारी बनाया है और चूंकि जीव ही जीव का भोजन है तो मांस खाना गलत नहीं है।बिलकुल अगर मनुष्य को ईश्वर ने सर्वाहारी बनाया है तो मांस खाना गलत नहीं है।इसलिए हमें मांस भक्षण करनी चाहिए।जीव ही जीव का भोजन है इस सिद्धान्त से भी अगर हम पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं तो मुर्गे-बकरी को क्यों नहीं?अगर शेर को हिरण खाने से पाप नहीं लगता तो मनुष्य को क्यों लगे?बिलकुल सत्य है।मैं स्वीकार करता हूँ कि मांस-भक्षण पाप या गलत नहीं है।पर प्रश्न ये है कि क्या ईश्वर ने मनुष्य को सर्वाहारी बनाया है?और क्या मुर्गे-बकरी जैसे जीव हमारे खाद्य-पदार्थ हैं?इस प्रश्न का उत्तर बहुत ही सरल है।मांसाहारी,सर्वाहारी और शाकाहारी जीवों के कुछ लक्षणों पर ध्यान दीजिए उत्तर मिल जाएगा।कुछ लक्षण मैं निम्नांकित कर रहा हूँ।
कुत्ता,बिल्ली जैसे सर्वाहारी जन्तु तथा शेर जैसे मांसाहारी जन्तु दोनों के लक्षण एक जैसे होते हैं तथा मनुष्य और गाय-बकरी जैसे शाकाहारी जीवों के आहार-विहार के लक्षण एक जैसे होते हैं।
1.जन्म के समय सभी मांसाहारी जीवों के बच्चों की आँखें बंद रहती है जबकि शाकाहारी जीवों के बच्चे की आँखें जन्म से ही खुली रहती है।
2.कुत्ते,बिल्ली और शेर जैसे जीवों के शरीर से पसीना नहीं निकलता है इस कारण कुत्ता हाँफता है जबकि शाकाहारी जीवों के शरीर से पसीना निकलता है।
3.मांसाहारी जीव मुंह से पानी नहीं पी सकते।उन्हें जिह्वा से पानी पीना पड़ता है जबकि सभी शाकाहारी जीव जिह्वा से नहीं मुंह से पानी पीते हैं।
4.मांसाहारी जंतुओं के बड़े-बड़े और नुकीले नाखून होते हैं जबकि शाकाहारी जीवों के नहीं।
5.शाकाहारी जीवों के दाँत मजबूत और नुकीले होते हैं जो मनुष्य या अन्य शाकाहारी जीवों में नहीं होते।
अब बताईए कि कौन से लक्षण मनुष्य को मांसाहारी या सर्वाहारी की श्रेणी में खड़े करते हैं।मनुष्य के बड़ी आंत में एक छोटी सी हड्डी होती है जिसे अपेंडिक्स कहा जाता है जिसका शरीर में कोई कार्य नहीं है वो एक अपशिष्ट अंग के रूप में है हमारे शरीर में जो बढ़ जाने पर काफी कष्ट भी देता है।जीव-विज्ञानियों का कहना है कि ये अंग शुरू से बेकार अंग नहीं था मनुष्यों में।पहले ये अंग सेल्यूलोज(रुक्षांस) के पाचन का कार्य करता था अर्थात मनुष्य घास खाकर भी पचा सकता था जैसे गाय और बकरी पचा लेते हैं।धीरे-धीरे मनुष्यों के आहार के आदतों में परिवर्त्तन आ जान के कारण इस अंग का उपयोग होना बंद हो गया और ये बेकार अंग बनकर रह गया।जीव-विज्ञानियों के अनुसार भी मनुष्य को ईश्वर ने एक शाकाहारी प्राणी बनाया है।
ये सारी बातें मुसलमान को तो मैं नहीं समझा सकता पर हिंदुओं को तो समझा ही सकता हूँ खासकर उन हिंदुओं को जो गौ-हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हैं पर खुद बकरी को काटकर खाते हैं।जब तक हिन्दू बकरी काटते रहेंगे तबतक उन्हें मुसलमानों को गाय काटने से रोकने का कोई हक नहीं बनता है।इसलिए अगर हमें हमारी पवित्र पूज्यनीय गौ माता की रक्षा करनी है और इस देश को स्वच्छ,पवित्र और खुशहाल बनाना है तो आईए हम सब भारतीय मिलकर शाकाहार अपनाने की शपथ लें।
एक और महत्त्वपूर्ण बात की आज भारत में गंदगी फैलने के प्रमुख कारणों में सबसे प्रमुख कारण मांसाहार है।गंदगी फैलाने में सबसे ज्यादा योगदान इसी का है।आप किसी भी सब्जी-मंडी के पास चले जाइए।उसके बगल में या सामने में बकरी-खस्सी के फेंके हुए गंदे आंत,चमड़ा,खून,सड़े हुए मांस आदि जरूर होते हैं।फार्म वाले मुर्गे का पंख और पैख़ाना से पूरा सड़क ही भरा हुआ रहता है।ये सारी चीजें इतनी गंदी होती है की श्वास लेना तो दूर देखने की भी हिम्मत नहीं होती।क्या बिना शाकाहार अपनाए हम स्वच्छ,सुंदर और स्वस्थ भारत का निर्माण कर पाएंगे......?
ये अटल सत्य है कि एक मांसाहारी व्यक्ति कभी देशभक्त नहीं हो सकता और एक देशभक्त व्यक्ति कभी मांसाहारी नहीं हो सकता।

1 टिप्पणी:

  1. वह क्या बात है .
    मैं शुद्ध शाकाहारी हू और शाकाहार का पुरजोर समर्थन करता हू . मैं कात्यायन गोत्र ब्रह्मण हू जहाँ कभी हर नवरात्री और अन्य विशेष अवसरों पर बकरे की बलि की प्रथा थी जो हमारी तीन पीड़ी पहले हमारी दादी जी ने अपने घोर विरोध के बावजूद न तो इसे अपनाया और न इस प्रथा को आगे बढ़ने दिया . आज वो हमारे बीच नही है पर उन के आदर्श के रूप में वो हम सब में जिन्दा है

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