रविवार, 13 फ़रवरी 2011

आइए वसंत के प्यार भरे सुहावने मौसम में हमसब मिलकर मनाएँ अपना प्यारा "वैलेंटाइन डे"



गेंदा,गुलाब,चमेली जैसे रंग-बिरंगे फूलों के सुगंध से भरे लुभावने,सुहावने इस वसंत के मौसम से अच्छा और कौन सा मौसम हो सकता है हमारे इस प्यार के पर्व वैलेंटाइन को मनाने का!है ना ! बिल्कुल उपयुक्त समय है ये।
इसलिए पहले आपलोगों को मैं बधाई तो दे दूँ.......
"आपलोगों को इस प्यार के पर्व की शुभकामनाएँ!!"
कुछ कमी रह गई ना??
ओह!माफ करिएगा॥देहाती जो ठहरा!!! अभी अपनी गलती सुधार लेता हूँ......
"Happy Valentine Day"
अब ठीक है ना? चॉकलेट को बिस्कुट के पैकेट में डालकर नहीं देना चाहिए किसी को।है ना ? दुविधा हो जाएगी ना!
चलिए छोड़िए ये सब बातें,बताइए आज आपलोग इस वैलेंटाइन डे को किस तरह से मना रहे हैं ??मेरे विचार से तो आपलोग किसी मॉल में जाएँगे,फिर हरेक मॉल में हॉल तो होता ही है तो किसी हॉल में जाकर एक अच्छी से मूवी देख लेंगे....... लेकिन मेरे विचार से यह जगह ठीक नहीं है क्योंकि इन जगहों पर इस दिन सब अपनी-अपनी गर्ल-फ्रेंड के सामने अपनी मर्दानगी दिखाने के चक्कर में झगड़ा-झंझट बहुत करते हैं।
तो फिर कहाँ........!
पार्क में...! हाँ ये ठीक रहेगा.. लेकिन,ये शिवसेना के गुण्डे??
ओह इससे डरने की क्या जरूरत है इनके इंतजाम के लिए ही तो हमने एक दिन के वैलेंटाइन डे को वीक में बदल दिया है।पहले एक दिन था तो ये लोग अपनी शक्ति दिखा भी देते थे पर अब तो इनकी शक्ति को आठ दिनों में बांटकर कमजोर कर दिया हमने।अब क्या बिगाड़ लेंगे ये मेरा।कितना परेशान करते थे हमें ये,इनको कोई मिलती नहीं थी तो इस बात का खुन्नस हम पर निकाल दिया करते थे।पर निकालते रहो आठ दिन अपनी खुन्नस।खुन्नस खत्म हो जाएगी लेकिन दिन खत्म नहीं होगा...
ओह!फिर गलती हो गई।अब तो हमारा वैलेंटाइन डे वीक बन चुका है तो अब तो हैप्पी वैलेंटाइन ""डे"" कहना मूर्खता ही है ना??
ठीक है अभी याद करके अपनी गलती सुधार लेता हूँ मैं........
समाचारपत्र में दिए गए सूची के अनुसार 7 को rose देने का दिन था यानि"Happy rose day" कहने का दिन था,इसी तरह 8 को हैप्पी प्रपोज डे, 9 को चॉकलेट डे,10 को Happy Teddy bear Day,11 को Happy Promise Day, 12 को Happy Hug Day और 13 को Happy Kiss Day कहने का।
अरे!!गलती मेरी कहाँ है,किसी ने बताया ही नहीं कि 14 तारीख को कौन सा डे है और क्या करना है इस दिन...........
कोई बात नहीं,कुछ बातें understood होती है।Under यानि अंदर की बात जो कही तो नहीं जाती बस समझी जाती है।है ना??लेकिन ये गलत बात है।आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं,आधुनिक हैं हम।फूल अटीट्यूड से भरा हुआ कूल ड्यूड हैं हम,अपने शरीर पर गोदना गोदवाकर....ओह क्षमा कीजिएगा गोदना नहीं टैटू बनवाकर अपने कपड़े की तरह ही शर्म को भी उतार फेंका हैं हमने इसलिए फूल न्यूड भी हैं हम।अब कौन ले इन कपड़ों को रोज धोने और पहनने का झंझट........?
तो बात यह है कि मुझे इस बात का बहुत दुःख है कि इतने खुले शरीर और खुले विचार रखने के बावजूद भी इन लोगों ने कभी खुलकर ये नहीं बताया कि 14 फरवरी को कौन सा "डे" है।पर आज मैं झारखण्डी अपने आपको सबसे ज्यादा बुद्धिमान,खुला और आधुनिक विचारवाला साबित करने का मौका अपने हाथ से जाने नहीं दूँगा। मैं अपने ऊपर लगे देहाती के दाग को धोकर रहूँगा।जिस बात को आपलोग कहने की हिम्मत नहीं कर पाए उसे मैं जरूर कहूँगा.........
प्रपोज करने,प्रोमिस कर देने "किस्स डे" और "हग डे" माना लेने के बाद तो एक ही चीज बचा रह जाता है और वो है "फग डे"
हैं ना??तो आप सबको आज मेरे ओर से "Happy Fug Day "।अब गुस्सा मत होइए या शरमाइए मत।क्योंकि आपलोग जितना भी झूठ बोल लीजिए मुझे पता है कि इस दिन को आपलोग बहुत अच्छे तरीके से मनाते हैं जिसका सबूत कूड़ेदान में जमा रहता है।ओह,फिर गलती हो गई।14 फरवरी को दिन में कहाँ इसे तो रात में मनाया जाता है।तो फिर इसे "डे" की बजाय नाइट कहना चाहिए ना!जो भी हो आपलोग थोड़ा एडजस्ट कर लीजिएगा।
पर एक बात मैं भी याद दिला देता हूँ कि हाई डेफ़िनेशन वाला कैमरा अपने साथ रखना मत भूलिएगा।अजी सिर्फ मोबाइल से MMS बना लेने से क्या होगा....!!! इन आठ दिनों में अगर 8 हजार अपनी गर्ल-फ्रेंड पर खर्च कर दिया है आपने तो कम से कम उसका 10 गुणा यान 80 हजार भी नहीं वसूल पाए तो क्या वसूले?फिर किस बात का आप आधुनिक??फिर तो आप मेरी तरह ही देहाती मूर्ख की श्रेणी में गए।आखिर आप हाई-टेक युग में रहने वाले सभी नई तकनीकों की जानकारी रखने वाले अपने
लाभ-हानि के एक-एक पैसे का हिसाब-किताब रखने वाले बुद्धिमान युवा हैं।आप कहीं भी invest करने के पहले यह जोड़-घटाव तो कर ही लेते होंगे ना कि इस इनवेस्टमेंट का फिर रिटर्न कितना मिलेगा आपको??
कभी-कभी बूढ़े लोगों की तरह मैं भी चिंतन में डूब जाता हूँ कि एक वो जमाना था जब एक कहावत थी कि दिल्ली दूर है अभी।क्योंकि तब बिहार से कोई चिट्ठी भी दिल्ली पहुँचने में सौ दिन लग जाया करते थे पर अब तो 100 दिन के बदले एक दिन क्या एक सेकेंड में पहुँच जाती है चिट्ठी।लोग सौ साल जिया करते थे अब 50 साल भी नहीं।यानि हर चीज बहुत तेज गति से दौड़ने लगी है।
हमारे दिल की धड़कन भी।
पहले जब कोई प्यार करता था तो उसपर एक मोटा ग्रंथ तैयार हो जाया करता था फिर भी उस कहानी के अंत तक प्रेमी प्रेमिका से मिल नहीं पाता था पर अब तो इस आठ दिन में ही सब-कुछ खत्म हो जाता है।एक पन्ने की कहानी में ही सब-कुछ खत्म।प्रेमी प्रेमिका से पहले दिन मिलता है और गुलाब दे देता है,फिर मूर्ख की तरह गुलाब दे देने के बावजूद प्रपोज भी करता है,और फिर छः दिन बाद ही मैक्सिमम शारीरिक एप्रोच भी कर लेता है।शादी तक का भी धैर्य नहीं..........
आखिर क्यों धीरज धरें हम??नियम-धरम,संयम ये सब तो उस पिछड़े हुए जमाने की बात थी जब गर्भ-निरोधक उपाय की कमी थी। पर अब तो हमारे पास गर्भ-निरोधक के सैकड़ों उपाय हैं। और उसपर भी हमें लिव-इन-रिलेशन्शीप का कानूनी अधिकार भी।वो जमाना तो उन मूर्खों का जमाना था जब लड़की बदसूरत चाँद से तुलना कर देने पर भी शर्म से अपना मुंह छुपा लेती है पर अब।अब तो जब तक लड़की को सेक्सी नहीं कह दिया जाता है उसे अपने सुंदर होने का एहसास ही नहीं होता है।उस समय लड़की की सोच होती थी कि शादी के पहले वो अपने प्रेमी को अपने शरीर को छूने तक नहीं देती थी और शादी के बाद भी अगर प्यार नहीं तो सेक्स नहीं पर अब; अब तो लड़की की सोच ये हो गई है कि शादी के पहले भी अगर सेक्स नहीं तो प्यार नहीं।यानि लड़का जब तक शारीरिक संबंध ना बना ले तब तक लड़की को प्यार का एहसास ही नहीं होता है।
प्यार और love में के अर्थ में जमीन-आसमान का अंतर चुका है अब।प्यार तो उन मूर्खों के जमाने के बात थी जब प्रेमी-प्रेमिका शादी और सात जनम क्या एक दूसरे के लिए जनम-जनम तक जीने मरने की कसमें खाते थे पर अब तो समझदारों के love करने का जमाना है।शादी कर लो या सेक्स कर लो,कोई फर्क नहीं पड़ता,आज सोनू तो कल मोनू।
आज के 90% से ज्यादा युवा गर्ल-फ्रेंड तो बनाना चाहते हैं पर उससे शादी करना नहीं चाहते।बचे 10% से भी कम जो शादी करना चाहते हैं पर उनमें से कितने सफल होते हैं ये तो आप भी जानते होंगे।
ऐसे में कितनी उपयोगिता है इस वैलेंटाइन डे की??
अंत में बस यही कहूँगा कि मैं भी युवा हूँ आपलोगों की तरह ही इसी पीढ़ी का हूँ।मेरी भावना भी आपकी तरह ही है,मेरी भी इच्छा होती है कि मेरे जीवन में भी एक प्यार हो पर अंतर बस इतना है कि आप लोगों की तरह मेरे अंदर प्यार का एहसास साल के 357 दिन सोया हुआ नहीं रहता और वैलेंटाइन वीक में नहीं जगता है।मैंने प्यार जैसे सुखद एहसास को एक दिन या एक सप्ताह में सीमित करके तो नहीं रखा है पर जब किसी से प्यार हो जाएगा तो अपने प्यार को एक लड़की तक जरूर सीमित रखूँगा।
आज यह दुनिया एक बाजार है जिसमें सब एक-दूसरे का प्रतिद्वंदी है और अपने-अपने लाभ के लिए बस स्वार्थरत है।
चाहे समाचार-पत्र हो या रेडियो-स्टेशन या फेसबूक हो या ऑर्कुट सब बिना हमारा लाभ-हानि सोचे बस अपनी लाभ के बारे में सोचता रहता है।देख लीजिए कितने गंदे-गंदे स्क्रैप के द्वारा ऑर्कुट युवाओं में प्रचार कर रहा है कि कौन सी तिथि को कौन सी छिछोरी हरकतें करनी है।बाजार ने भी अपना लाभ उठाने के लिए एक दिन को आठ दिन बना दिया। यानि आप भी गुलाब बेच लो,हम भी चॉकलेट बेच लें,बंटी भी टेड्डी बेच ले और बबलू तुम भी गिफ्ट बेच लो......इसी बाजार ने तो इस दिन को एक दिन से आठ दिन बनाया ताकि अगर किसी को इस दिन के बारे में पता नहीं भी है तो आसानी से पता चल जाय।
पर हम मूर्ख क्यों बनें।हम भारतीय हैं,, क्यों मनाएँ हम ये व्यर्थ का दिन जबकि इससे अच्छे-अच्छे कई दिन हैं हमारे पास मनाने के लिए,कुछ दिन पहले ही वसंत-पंचमी खत्म हुई है बताइए हममें से कितनों ने प्रेम-पूर्वक इस दिन को मनाया....!आपलोगों को पता है कि इस प्यार के सप्ताह में अमेरिका में सबसे ज्यादा तलाक के लिए अर्जी दी गई है।इसलिए ही ना कि अपने पुराने जीवनसाथी यानि अपनी पत्नी को ना तो उन्हें फिर से प्रपोज करने में मजा आएगा ना गुलाब देने में.........गुलाब देने,प्रपोज करने,किस्स और हग करने में तो उन्हें नए साथी के साथ ही आनंद आएगा।क्या यही समाज आप भी बनाना चाहते हैं हमारे प्यारे से भारत देश को??
आपलोग मानें या ना मानें पर इस कड़वी सच्चाई को याद रखिएगा की प्यार और love में, Kiss करने और चूमने में, हग करने और गले लगाने में, Girlfriend और प्रेमिका के अर्थ में वही अंतर है जो अंतर हीरा और काँच के क्रिस्टल में है।अब ये मैं आप पर छोडता हूँ।आप जिसे चुनना चाहें चुन लीजिए....बस चुनते समय इस बात को ध्यान में रखिएगा कि आप किन पूर्वजों की सन्तानें हैं और आपकी रगों में किन लोगों को खून दौड़ रहा है,दो मिनट इस बात पर विचार जरूर कर लीजिएगा।

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